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सत्य निकेतन हादसे के बाद दहशत में छात्र! PG छोड़ कॉलेज पहुंचे 72 विद्यार्थी, अब सिस्टम पर सवाल...

सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली में पुराने मकानों और PG की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। MCD ने आसपास की इमारतों को भी जांच के दायरे में लिया है। हादसे से डरे छात्र PG खाली कर रहे हैं, जबकि कई कॉलेजों ने उनके लिए अस्थायी रहने की व्यवस्था शुरू की है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद दहशत में छात्र! PG छोड़ कॉलेज पहुंचे 72 विद्यार्थी, अब सिस्टम पर सवाल...
सत्य निकेतन हादसे के बाद खुली PG सिस्टम की पोल

नई दिल्ली। सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद अब सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, बल्कि राजधानी में छात्रों के लिए बने PG की सुरक्षा का भी है। रविवार को पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हुए। इसके बाद MCD ने पूरी दिल्ली में इमारतों की जांच के आदेश दिए हैं। हादसे के आसपास की दो और इमारतों को भी खतरनाक बताया गया है। दूसरी ओर, डर के कारण कई छात्र अपने घर लौट रहे हैं या रिश्तेदारों के यहां जा रहे हैं। कुछ कॉलेजों ने प्रभावित छात्रों को अपने परिसर में ठहराने की व्यवस्था की है।

सात मौतों ने खड़े किए कई बड़े सवाल

सत्य निकेतन में हुए हादसे ने दिल्ली के PG सिस्टम की कमजोर तस्वीर सामने ला दी है। इलाके में बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और हॉस्टल में रहते हैं। दक्षिण दिल्ली के इस इलाके में कई कॉलेज होने के कारण यहां हर साल बड़ी संख्या में छात्र पढ़ने आते हैं। लेकिन सरकारी हॉस्टल की सीमित सुविधा के कारण उन्हें निजी मकानों का सहारा लेना पड़ता है। इलाके में करीब 300 मकान बताए जाते हैं, जिनमें लगभग 170 मकानों में PG चलने की जानकारी सामने आई है। कई जगह पुराने मकानों में अतिरिक्त मंजिलें बना दी गई हैं। संकरी गलियों और एक-दूसरे से सटी इमारतों के बीच सुरक्षा नियमों की अनदेखी भी बड़ी चिंता बन गई है।

हादसे के बाद बगल की इमारतों पर भी खतरा

जिस इमारत के गिरने से सात लोगों की जान गई, उसके पास मौजूद 12 और 13 नंबर की इमारतों को भी MCD ने खतरनाक माना है। दोनों इमारतों को तीन दिन में खाली करने का नोटिस दिया गया है। फिलहाल इन ढांचों को लोहे के गार्डरों का सहारा दिया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन इमारतों की हालत पहले क्यों नहीं देखी गई। अगर आसपास के मकान भी जोखिम में थे, तो उनकी जांच हादसे से पहले क्यों नहीं हुई? लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि कार्रवाई हमेशा किसी बड़ी घटना के बाद ही क्यों शुरू होती है।

पूरी दिल्ली में शुरू होगी इमारतों की जांच

हादसे के बाद MCD ने सभी जोन के अधिकारियों को अपने-अपने इलाकों की इमारतों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से 10 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी गई है। इस रिपोर्ट को दिल्ली हाईकोर्ट में पेश किए जाने वाले हलफनामे में भी शामिल किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होनी है।MCD के अनुसार, इस साल की शुरुआत में करीब 27.84 लाख इमारतों का सर्वे किया गया था। इनमें केवल 19 इमारतों को खतरनाक बताया गया था। सत्य निकेतन की घटना के बाद इस आंकड़े को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या जमीनी स्तर पर जांच उतनी प्रभावी है, जितनी कागजों में दिखाई देती है।

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छात्रों में डर, कई ने बदला ठिकाना

हादसे के बाद सत्य निकेतन के PG में रहने वाले छात्रों में डर साफ दिखाई दे रहा है। कई परिवारों ने अपने बच्चों को वापस घर बुला लिया है। कुछ छात्र दिल्ली में रिश्तेदारों के यहां जा रहे हैं, जबकि कुछ ने सुरक्षित जगह मिलने तक दोस्तों के साथ रहने का फैसला किया है। जिन PG को सुरक्षा कारणों से खाली कराया जा रहा है, वहां रहने वाले छात्रों की मदद उनके साथी कर रहे हैं। कई छात्रों ने अपने कमरों में दूसरे विद्यार्थियों को जगह दी है। खाने की परेशानी के बीच इलाके का गुरुद्वारा भी छात्रों के लिए सहारा बना हुआ है, जहां उन्हें लंगर मिल रहा है।

कॉलेजों ने खोले अपने दरवाजे

हादसे के बाद आसपास रहने वाले छात्रों के लिए कॉलेजों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। एक कॉलेज ने 10 कमरों की व्यवस्था कर प्रभावित विद्यार्थियों को ठहराया। रविवार रात वहां 46 छात्र और 26 छात्राएं रुके। कॉलेज के प्राचार्य और स्टाफ ने भी छात्रों के साथ रात बिताई। छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल राहत नहीं बल्कि लंबे समय के लिए सुरक्षित आवास चाहिए। उनका कहना है कि PG में किराया तो लिया जाता है, लेकिन कई जगह बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा की ठीक व्यवस्था नहीं होती।

तीन आरोपी गिरफ्तार, अधिकारियों पर भी कार्रवाई

पुलिस ने इमारत मालिक उर्मिला गुप्ता, उनके पति हरिराम गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस PG संचालकों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की भूमिका की भी जांच कर रही है। वहीं MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। अब जांच का असली सवाल यह है कि हादसे के पीछे सिर्फ मकान मालिक की लापरवाही थी या निगरानी व्यवस्था भी जिम्मेदार थी। दिल्ली में पिछले तीन वर्षों में इमारत गिरने की 1,133 घटनाओं में 98 लोगों की मौत का आंकड़ा इस चिंता को और गंभीर बनाता है।

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दिल्ली सरकार ने अवैध पांचवीं मंजिलों को सील करने, PG और दूसरी इमारतों की जांच कराने तथा सुरक्षा नियमों को सख्त करने की बात कही है। जर्जर इमारतों के मालिकों को खुद ढांचा हटाने का नोटिस देने की भी तैयारी है लेकिन सत्य निकेतन की घटना ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ नोटिस और घोषणाओं से सुरक्षा नहीं मिलेगी। जरूरी है कि खतरनाक इमारतों की पहचान समय रहते हो, PG की नियमित जांच हो और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई हादसे से पहले हो।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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