सर्दियों के मौसम में धमनियों का सिकुड़न :ठंडे पानी से नहाने की एक गलती हार्ट अटैक को दे रही न्यौता, सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये नियम

सर्दियों के मौसम में तापमान ठंडा होने के साथ हमें अपने शरीर पर भी ध्यान देना बहुत जरुरी है। कड़कड़ाती ठंड के इस मौसम में हार्ट अटैक के खतरे की संभावना भी सबसे अधिक होती है। क्योंकि इस सीजन में दिल के कारण रक्त प्रवाह रुक जाता है। और नसें सिकुड़ जाती है। हार्ट अटैक में दिल की मांसपेशियों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता है। जिससे खून के थक्के बन जाते हैं।
धमिनयों पर क्या पड़ता है असर
अमेरिकन हार्ट अटैक एसोसिएशन के मुताबिक, ठंड का मौसम आते ही बॉडी अपने अंदर के तापमान को मेंटेन करने के लिए सजगताएं बनाती है। दरअसल इसमें एक प्रमुख प्रतिक्रयाएं धमनियों की दिवारों में चिकनी मांसपेशियां कस जाती है जिससे वाही का संकुचन होता है। नतीजतन वाही का व्यास छोटा होता है। और रक्तचाप बढ़ जाता है।
ठंडे पानी से नहाना मतलब मुसीबत को न्यौता
इस मौसम में अक्सर कई लोग ठंडे पानी से नहाते हैं। लेकिन यह आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है। दरअसल इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अचानक ठंडे पानी से नहाने के कारण रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती है। जिससे शरीर को झटका लगता है। और दिल का दौरा आने की संभावना सबसे ज्यादा होता है।
अगर आप ठंडे पानी से नहाते हैं तो सीधे शॉवर न ले, इसकी जगह आप बाल्टी से नहा सकते हैं। क्योंकि इसमें तापमान को कंट्रोल किया जा सकता है।
किन लोगों को सावधानी बरतने की जरुरत
हाई ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग के साथ-साथ जिन लोगों के शरीर में ठंड के अनुकुल ढलने में दिक्कतें होती है। जैसे खराब रक्त संचार और मधुमेह से पीड़ित लोग। ऐसे लोगों के लिए डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि उन्हें सिर्फ सर्दियों के ऊनी कपड़ों से नहीं ढकना चाहिए। बल्कि ह्दय संबंधी जोखिम पर भी ध्यान देना चाहिए।
सुरक्षित रहने के लिए आज ही अपनाएं ये नियम
- गर्म कमरे से अगर ठंडे कमरे में जाना है तो सीधे न जाएं, आपको एक छोटे से परिवर्तन के लिए रुकना चाहिए। खिड़की खोले और गर्म पानी पीए। इससे बॉडी को अनुकूलित होने का मौका मिलता है।
- सर्दी के मौसम में यदि बाहर ठंड ज्यादा हो तो गर पर ही वॉर्म-अप करे। इसमें 5 मिनट देकर आप घर में टहल सकते हैं, स्ट्रेचिंग और हाथों का मूवमेंट कर सकते हैं।
- इस मौसम में आप नाइट्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे चुकंदर, इन मौसम में आने वाली सब्जियां खाएं।
- ज्यादा से ज्यादा निगरानी और आदतों में बदलाव करें।




















