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SpaceX Moon Crash:चांद से टकराएगा SpaceX के रॉकेट का हिस्सा, बनेगा 60 फीट चौड़ा गड्ढा; जानिए क्यों हो रही यह टक्कर

अंतरिक्ष में आज एक बड़ी और दुर्लभ घटना होने जा रही है। SpaceX के फाल्कन-9 रॉकेट का लगभग 4 टन वजनी दूसरा चरण तेज रफ्तार से चंद्रमा की सतह से टकराएगा।
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चांद से टकराएगा SpaceX के रॉकेट का हिस्सा, बनेगा 60 फीट चौड़ा गड्ढा; जानिए क्यों हो रही यह टक्कर
आज SpaceX के फाल्कन-9 रॉकेट का दूसरा चरण तेज रफ्तार से चंद्रमा से टकराएगा

अंतरिक्ष में आज एक ऐसी घटना होने जा रही है, जिस पर दुनियाभर के साइंटिस्ट की नजरें टिकी हुई हैं। दुनिया की सबसे अंतरिक्ष कंपनी SpaceX के रॉकेट का लगभग चार टन वजनी हिस्सा चंद्रमा से टकराने वाला है। यह टक्कर किसी योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक अनियंत्रित अंतरिक्ष मलबे के कारण होने जा रही है। हालांकि इस घटना से पृथ्वी पर रहने वाले लोगों को किसी तरह का खतरा नहीं है, लेकिन इससे चंद्रमा की सतह पर एक नया बड़ा गड्ढा बनेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना भविष्य में चंद्रमा और अंतरिक्ष से जुड़ी रिसर्च के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

स्कूल बस जितना बड़ा है रॉकेट का यह हिस्सा

जानकारी के मुताबिक, चंद्रमा से टकराने वाला यह हिस्सा SpaceX के फाल्कन-9 रॉकेट का दूसरा चरण (Second Stage) है। इसका आकार लगभग एक स्कूल बस जितना बताया जा रहा है। यह हिस्सा जनवरी 2025 में लॉन्च किए गए मिशन के दौरान इस्तेमाल हुआ था, जब फाल्कन-9 रॉकेट ने फायरफ्लाई एयरोस्पेस के लूनर लैंडर को चंद्रमा की ओर भेजा था। मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का यह हिस्सा वापस पृथ्वी पर नहीं लौटा और अंतरिक्ष में ही भटकता रहा। अब यह तेज रफ्तार से चंद्रमा की सतह से टकराने वाला है।

किस समय और कितनी रफ्तार से होगी टक्कर?

वैज्ञानिकों के अनुसार यह टक्कर भारतीय समयानुसार बुधवार दोपहर करीब 12:05 बजे होगी। उस समय रॉकेट का यह हिस्सा लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा की सतह से टकराएगा। इतनी तेज गति से होने वाली इस टक्कर के कारण चंद्रमा की सतह पर धूल और पत्थरों का बड़ा गुबार उठ सकता है। हालांकि यह गुबार कुछ समय तक सूर्य की रोशनी में चमक सकता है, लेकिन पृथ्वी से इसे नंगी आंखों से देख पाना लगभग असंभव होगा।

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चांद पर बनेगा नया विशाल गड्ढा

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुमान के अनुसार इस टक्कर के बाद चंद्रमा पर लगभग 60 फीट (करीब 18 मीटर) चौड़ा और 12 फीट (करीब 4 मीटर) गहरा गड्ढा बन सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह टक्कर चंद्रमा के पश्चिमी हिस्से में स्थित आइंस्टीन क्रेटर के पास होगी। यह इलाका पृथ्वी से आसानी से दिखाई नहीं देता, इसलिए इस घटना को सीधे देख पाना संभव नहीं होगा।

क्या पृथ्वी को कोई खतरा है?

इस घटना को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे पृथ्वी को कोई नुकसान होगा? इसका जवाब है नहीं। वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह टक्कर पूरी तरह चंद्रमा पर होगी और इसका पृथ्वी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। न तो कोई विस्फोट पृथ्वी तक पहुंचेगा और न ही किसी तरह का मलबा धरती पर गिरेगा। इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

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हिस्सा वापस पृथ्वी पर क्यों नहीं आया?

रॉकेट कई हिस्सों में बना होता है, जिन्हें स्टेज (Stage) कहा जाता है। जब रॉकेट किसी उपग्रह, अंतरिक्ष यान या लैंडर को अंतरिक्ष में पहुंचाता है, तब उसका काम पूरा होने के बाद अलग-अलग स्टेज अलग हो जाते हैं। आमतौर पर ये हिस्से वापस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और घर्षण के कारण जलकर खत्म हो जाते हैं। कुछ मामलों में इन्हें समुद्र में गिरने के लिए भी निर्देशित किया जाता है।

चंद्र मिशन के लिए ज्यादा ताकत की जरूरत

जनवरी 2025 में लॉन्च किए गए इस मिशन का लक्ष्य चंद्रमा तक पहुंचना था। चंद्रमा पृथ्वी की तुलना में काफी दूर है, इसलिए रॉकेट को ज्यादा दूरी तय करनी थी और इसके लिए अधिक ताकत यानी थ्रस्ट की जरूरत थी। इसी वजह से फाल्कन-9 रॉकेट का दूसरा चरण पृथ्वी के वातावरण में वापस लौटने की बजाय अंतरिक्ष में ही रह गया। यह धीरे-धीरे अपनी दिशा बदलता रहा और हजारों दूसरे अंतरिक्ष मलबे के बीच बिना किसी नियंत्रण के घूमता रहा।

ईंधन खत्म होने के बाद नहीं रहा नियंत्रण

वैज्ञानिकों ने इस साल की शुरुआत में पता लगाया कि रॉकेट के इस हिस्से का बचा हुआ ईंधन पूरी तरह खत्म हो चुका है। ईंधन खत्म होने के बाद इसे किसी भी दिशा में मोड़ना या नियंत्रित करना संभव नहीं था। इसके बाद इसकी कक्षा (ऑर्बिट) का अध्ययन किया गया। तब पता चला कि यह धीरे-धीरे ऐसे रास्ते पर बढ़ रहा है, जिसका अंतिम पड़ाव चंद्रमा की सतह है। यानी इसकी टक्कर लगभग तय हो चुकी थी और इसे रोका नहीं जा सकता था।

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वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास है यह घटना?

हालांकि यह टक्कर दुर्घटनावश हो रही है, लेकिन वैज्ञानिक इसे एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। इस घटना के बाद बनने वाले नए गड्ढे का अध्ययन करके वैज्ञानिक कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटा सकते हैं। जैसे- 

  • चंद्रमा की सतह कितनी मजबूत है।
  • टक्कर के समय कितनी धूल और पत्थर बाहर निकलते हैं।
  • चंद्रमा की ऊपरी परत के नीचे क्या मौजूद है।
  • भविष्य के चंद्र मिशनों की योजना कैसे बेहतर बनाई जा सकती है।
  • अंतरिक्ष मलबे के प्रभाव को समझने में क्या मदद मिल सकती है।

यदि चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे ऑर्बिटर इस इलाके की तस्वीरें लेते हैं, तो वैज्ञानिक पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना करके इस टक्कर का अध्ययन कर सकेंगे।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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