Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
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19 Jan 2026
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19 Jan 2026
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोमवार 13 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिली है। अमेरिका और चीन के बीच फिर से बढ़े व्यापार तनाव, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों और वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण निवेशकों ने एक बार फिर से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख किया है। एमसीएक्स पर दिसंबर वायदा में सोना 1,23,286 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी 1,51,050 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही हैं। यह दोनों ही धातुएं अपने सर्वकालिक उच्च स्तरों के बेहद करीब हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया और इसकी कीमत 4,060 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई।
यह लगातार आठवां सप्ताह है, जब सोने की कीमतों में तेजी देखी गई। चांदी भी ऐतिहासिक उच्च स्तरों के पास बनी हुई है, खासकर लंदन बाजार में हुए शॉर्ट स्क्वीज और अमेरिका-चीन व्यापार टकराव के कारण। इन दोनों घटनाओं ने निवेशकों को जोखिम भरे निवेशों से निकालकर सुरक्षित संपत्तियों की ओर मोड़ दिया है। मौजूदा दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से जूझ रही है। अमेरिका में चल रहा सरकारी शटडाउन अपने तीसरे सप्ताह में पहुंच चुका है, जिसके चलते आर्थिक आंकड़ों की रिपोर्टिंग में देरी हो रही है। इस कारण निवेशकों में सावधानी और बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। दूसरी ओर, फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) के द्वारा साल के शेष बैठकों में 25-25 बेसिस पॉइंट की दर से ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीद की जा रही है।
ब्याज दरों में कमी से बिना ब्याज वाले सोने की आकर्षण शक्ति और बढ़ जाती है, जिससे इसकी मांग में तेजी आती है। इस वर्ष अब तक सोने की कीमतों में लगभग 54% की वृद्धि हो चुकी है। इसका मुख्य कारण भू-राजनीतिक जोखिमों का बढ़ना, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद, ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में बढ़ते निवेश और अमेरिकी डॉलर से हटकर वैकल्पिक सुरक्षित संपत्तियों की ओर झुकाव है। एलकेपी सिक्योरिटीज के विश्लेषक जतीन त्रिवेदी के अनुसार, “सोने की मौजूदा तेजी अमेरिका में चल रहे सरकारी शटडाउन और ‘डी-डॉलराइजेशन’ की वैश्विक प्रवृत्ति से प्रेरित है, जिसने निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित किया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में मुनाफावसूली और कुछ भू-राजनीतिक स्पष्टता, विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इज़राइल-हमास युद्धविराम की घोषणा, इस तेजी को अस्थायी रूप से सीमित कर सकती है।