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'आपकी शादी भी AAP की वजह से हुई…',सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर लगाए कई आरोप

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और बीजेपी से नजदीकी के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने यहां तक कहा कि उनकी निजी उपलब्धियां भी पार्टी की वजह से संभव हुईं। सौरभ के इन बयानों से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर लगाए कई आरोप

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के भीतर सियासी तनाव एक बार फिर सामने आ गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर आरोप लगाते हुए कई ऐसे बयान दिए हैं, जिन्होंने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। सौरभ भारद्वाज के अनुसार राघव चड्ढा पिछले काफी समय से पार्टी लाइन से अलग होकर काम कर रहे थे और उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर रणनीतिक रूप से काम किया। साथ ही सौरभ ने कहा कि अगर आज आपकी शादी हो पाई है, तो वह इसलिए क्योंकि पार्टी ने आपको राज्यसभा के अंदर मेंबर बनाया वरना कोई आपको पूछता भी नहीं। 

'AAP ने मौका दिया, तभी पहचान बनी'-सौरभ का तंज

सौरभ भारद्वाज ने अपने बयान में राघव चड्ढा की व्यक्तिगत उपलब्धियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर आज राघव चड्ढा की राजनीतिक और सामाजिक पहचान बनी है, तो उसमें आम आदमी पार्टी की बड़ी भूमिका रही है। उनका कहना था कि राज्यसभा में मौका मिलने और पार्टी के समर्थन के बिना यह मुकाम हासिल करना मुश्किल था। सौरभ ने यह भी कहा कि पार्टी ने उन्हें मंच दिया, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि बनी।

बीजेपी से नजदीकी के आरोप

सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर यह भी आरोप लगाया कि वे लंबे समय से बीजेपी से जुड़े मुद्दों पर रणनीतिक रूप से काम कर रहे थे। उनके अनुसार पिछले एक साल से चड्ढा ऐसे मुद्दे उठा रहे थे, जिनसे उनकी एक 'न्यूट्रल और लोकप्रिय' छवि बनाई जा सके। उन्होंने दावा किया कि एयरपोर्ट वेंडर्स, मोबाइल रिचार्ज और फूड डिलीवरी जैसे मुद्दों को चुनकर उठाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था।

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'छोड़ सकते थे पार्टी, लेकिन रास्ता गलत चुना'

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि किसी भी नेता को पार्टी छोड़ने का अधिकार है, लेकिन जिस तरीके से राघव चड्ढा ने कदम उठाए, वह सही नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर असहमति थी तो पार्टी से अलग होना एक विकल्प हो सकता था, लेकिन 'साजिश' का रास्ता चुनना गलत था।

'विचारधारा से जुड़ाव जरूरी'

सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा के पार्टी बदलने की तुलना नौकरी बदलने से करने वाले तर्क पर जवाब देते हुए कहा, जब हम नौकरी बदलते हैं या किसी कंपनी में काम करते हैं, तो उसका विचारधारा से कोई लेना‑देना नहीं होता। आप विचारधारा के कारण किसी पार्टी में शामिल होते हैं और उसी के अनुसार जीवन जीते हैं।

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राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल

पार्टी के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। हालांकि राघव चड्ढा की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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