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ऑस्ट्रेलिया सोने की खदानों के खाली पड़े गड्ढ़ों को बदलेगा बिजली के हाइड्रो स्टोरेज हब में, मांग बढ़ने पर करेंगे यहां से सप्लाई

ऑस्ट्रेलियन रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी की इस सुविधा को बिजली स्टोर करने और पीक अवर्स में उसे सप्लाई करने के लिए डिजाइन किया गया है। डिमांड बढ़ने पर इसे शुरू होने में 30 सेकंड से भी कम समय लगने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट वर्तमान माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का दोबारा इस्तेमाल करेगा।
ऑस्ट्रेलिया सोने की खदानों के खाली पड़े गड्ढ़ों को बदलेगा बिजली के हाइड्रो स्टोरेज हब में, मांग बढ़ने पर करेंगे यहां से सप्लाई
ऑस्ट्रेलिया सोने की खदानों के खाली पड़े गड्ढ़ों को बदलेगा बिजली के हाइड्रो स्टोरेज हब में

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया पुरानी पड़ी खदानों को एनर्जी स्टोरेज सेंटर में बदल रहा है। देश के किडस्टन रिन्यूएबल एनर्जी हब फॉर नॉर्थ क्वींसलैंड में सोने की एक पुरानी खदान को इसके लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए खदान को पंप-हाइड्रो एनर्जी स्टोरेज सुविधा में बदला जा रहा है। इस सिस्टम में खदानों को ऊपरी और निचले जलाशय के रूप में उपयोग किया जाएगा। हाइड्रो प्रोजेक्ट में बंद हो चुकी खदान के दो गड्ढों का इस्तेमाल होगा जिसमें एक ऊंचाई पर है और दूसरा नीचे।

8 घंटे की ऊर्जा को स्टोर कर सकेंगे

तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट की क्षमता 250 MW और स्टोरेज क्षमता 2,000 MWh होगी। इसमें करीब 8 घंटे की उर्जा को स्टोर किया जा सकेगा। ऑस्ट्रेलियन रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी ने इस बारे में बताया कि इस सुविधा को बिजली स्टोर करने और मांग बढ़ने पर उसे सप्लाई करने के लिए डिजाइन किया गया है। यहां से बिजली सप्लाइ शुरू होने में 30 सेकंड से भी कम समय लगेगा। यह प्रोजेक्ट मौजूदा माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी इस्तेमाल करेगा और रिन्यूएबल एनर्जी हब को ट्रांसमिशन लाइन से ऑस्ट्रेलिया की नेशनल ग्रिड से जोड़ेगा।

गड्ढों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है

यह प्रोजेक्ट मौजूदा गड्ढों को एक बड़े एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में बदल देगा। इस हाइड्रो सिस्टम को नए जलाशय बनाने की जगह खदान के पुराने गड्ढों का इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया है। सिस्टम जब बिजली की कीमतें कम होती हैं तो पानी को पंप करके ऊपरी जलाशय में भेजता है और जब मांग ज्यादा होती है तो बिजली बनाने के लिए इसे रिवर्सिबल टर्बाइन के जरिए निचले जलाशय में छोड़ा जाता है ताकि एकस्ट्रा बिजली बन सके। एजेंसी ने बताया है कि खदान के बड़े गड्ढों का इस्तेमाल इस तरह से एनर्जी स्टोरेज के लिए पानी जमा करने के मकसद से किया जा रहा है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए पानी ग्राउंडवाटर और बारिश से हासिल किया जाएगा।

पंप-हाइड्रो सुविधा कितनी एनर्जी जमा कर सकती है?

पंप-हाइड्रो सुविधा की कैपेसिटी 250 MW और एनर्जी स्टोरेज क्षमता 2,000 MWh है। ARENA का कहना है कि इससे लगभग आठ घंटे का स्टोरेज मिलता है और यह 143,000 घरों को बिजली देने के लिए काफी होगा। एजेंसी ने यह भी बताया कि प्लांट को 30 सेकंड से भी कम समय में शुरू होने के हिसाब से डिजाइन किया गया है।

रिन्यूएबल एनर्जी का भी करेंगे इस्तेमाल

इस सिस्टम का मकसद रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन के साथ मिलकर काम करना है। इस संबंध में ऑट्रेलियन रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (ARENA) ने बताया कि सोलर और विंड फार्म से मिलने वाली एनर्जी को स्टोरेज सिस्टम के जरिए नेशनल ग्रिड तक पहुंचाया जा सकता है।

माइन इंफ्रा का इस्तेमाल

प्रोजेक्ट में पुरानी माइन के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल हो रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने इस बारे में बताया कि वर्तमान माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के दोबारा इस्तेमाल से रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट से जुड़ी जमीन के इस्तेमाल और मंजूरी से जुड़ी कुछ चुनौतियों से बचा जा सका। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार इस प्रोजेक्ट में साफ की गई जमीन और मौजूदा सड़कों का इस्तेमाल किया गया है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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