अनोखी यात्रा: 28 साल में 50 हजार किमी पैदल चलकर 29 देशों का सफर, इंग्लिश चैनल भी तैरकर पार की

ब्रिटेन के एडवेंचरर कार्ल बुशबी 28 साल पैदल चलकर यूके लौट आए हैं। उन्होंने करीब 50,000 किलोमीटर का सफर तय किया। यह सफर 1 नवंबर 1998 को शुरू हुआ था। 57 साल की उम्र में कार्ल ने इंग्लिश चैनल तैरकर ब्रिटेन की जमीन छुई। यही इस यात्रा का सबसे अहम मोड़ रहा।
कार्ल बुशबी ने अपने अभियान को गोलियथ एक्सपेडिशन नाम दिया है। मकसद था पैदल दुनिया का चक्कर लगाना। आखिर में उत्तरी इंग्लैंड में हल के पास मां के घर पहुंचना था। सोमवार दोपहर वे डोवर के पास शेक्सपियर बीच पहुंचे।
कार्ल ने फ्रांस से यूके तक तैरने में तीन दिन लगाए। इस दौरान वे करीब 20 घंटे पानी में रहे। 2 नवंबर 2026 को वे अपने गृहनगर हल (Hull) पहुंच गए। इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। लेकिन इस जीत के पीछे 28 साल की मेहनत छिपी है।
28 साल पैदल यात्रा कैसे शुरू हुई?
कार्ल ने 1 नवंबर 1998 को दक्षिणी चिली के पुंटा एरेनास से यात्रा शुरू की। तब उनकी उम्र 29 साल थी। उनका लक्ष्य पैदल दुनिया नापकर मां के घर पहुंचना था। उन्होंने खुद के लिए दो नियम बनाए थे। पहला, सफर चलाने के लिए किसी तरह का ट्रांसपोर्ट (वाहन) इस्तेमाल नहीं करेंगे। दूसरा, यात्रा पूरी होने तक यूके (UK – United Kingdom) नहीं लौटेंगे।
कौन हैं कार्ल बुशबी?
कार्ल बुशबी का जन्म 1969 में हल में हुआ। वे पहले ब्रिटिश सेना में पैराट्रूपर (हवाई छतरी से उतरने वाले सैनिक) थे। इस अनुभव ने उनमें चुनौतियां लेने और नई जगहें खोजने की इच्छा जगाई। उन्होंने 29 साल की उम्र में ग्लोबल वॉक (दुनिया भर की पैदल यात्रा) शुरू करने का फैसला लिया। सफर की शुरुआत सिर्फ 500 डॉलर यानी आज के करीब 45 हजार रुपए। इतनी कम पूंजी में 28 साल का सफर किया।
हाथ से बना नक्शा और 12 साल का अनुमान
उन दिनों सब कुछ कागज के नक्शे, पेंसिल और कैलकुलेटर से होता था। कार्ल ने शुरुआत में अपना नक्शा हाथ से बनाया। उन्होंने इस अभियान को गोलियथ एक्सपेडिशन नाम दिया। उनका अनुमान था कि 31,000 मील की यात्रा में 12 साल लगेंगे, लेकिन 28 साल बीत गए। यानी अनुमान से 16 साल ज्यादा लगे। इस हिसाब से रोज का औसत करीब 5 किलोमीटर बैठता है। यह औसत 50,000 किलोमीटर को 28 साल में बांटकर निकला है।
29 देशों में कहां-कहां से गुजरे कार्ल?
कार्ल पहले दक्षिण अमेरिका से पैदल गुजरे। फिर उन्होंने डेरियन गैप पार किया। मध्य अमेरिका से होकर वे उत्तर की ओर गए। इसके बाद वे अमेरिका और कनाडा पहुंचे। मार्च 2006 में अलास्का और रूस के बीच समुद्र की बर्फ पार करनी थी। तब फ्रांसीसी-अमेरिकी एडवेंचरर दिमित्री कीफर उनके साथ जुड़े। दर्ज इतिहास में यह पहली बार हुआ था।
कार्ल ने बेरिंग जलडमरूमध्य (दो जमीनों के बीच समुद्र की संकरी पट्टी) पैदल पार किया। फिर वे साइबेरिया, मंगोलिया, चीन और एशिया के अन्य हिस्सों से गुजरे। सबसे मुश्किल हिस्सों में कैस्पियन सागर पार करना था। इसमें 31 दिन लगे। एक महीने से ज्यादा का वह सफर कितना कठिन रहा होगा?
यात्रा 28 साल तक क्यों खिंच गई?
बुशबी की यात्रा में बार-बार ऐसी वजहों से देरी हुई, जो उनके बस में नहीं थीं। इनमें वीजा जैसी मुश्किलें भी थीं। साल 2007-08 के आर्थिक संकट में उनके पास कोई स्पॉन्सर (प्रायोजक) नहीं बचा। फिर कोविड-19 महामारी आई। बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों (देशों के आपसी हालात) ने भी कई बार यात्रा रोकी। फिर भी यह यात्रा 28 साल बाद पूरी हुई।
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इंग्लिश चैनल तैरकर क्यों पार किया?
जून में कार्ल की योजना को झटका लगा। चैनल टनल के अधिकारियों ने सर्विस टनल (सुरंग का सेवा वाला रास्ता) इस्तेमाल करने की उनकी रिक्वेस्ट ठुकरा दी। यह विकल्प खत्म हो गया। ब्रिटेन पहुंचने का एक ही रास्ता बचा। तैरकर चैनल पार करना। यह इंग्लिश चैनल तैरना आसान नहीं था। आम तौर पर चैनल पार करने की शुरुआत यूके से होती है।
कार्ल को फ्रांस से शुरुआत करनी थी। टीम ने बताया कि फ्रांस और ब्रिटेन, दोनों देशों के अधिकारियों से इजाजत ली गई थी। सुरक्षा कारणों से सही समय की जानकारी गुप्त रखी गई। ब्रिटेन की तटरक्षक सेवा एचएम कोस्टगार्ड ने भी बयान दिया। उसने कहा कि फ्रांस के अधिकारियों और समुद्री सहयोगियों के साथ मिलकर सुरक्षा इंतजाम पक्के किए गए।
ब्रिटेन की जमीन पर कार्ल ने क्या कहा?
"इतने सालों बाद UK की जमीन पर पैर रखकर अच्छा लग रहा है। यह आसान नहीं था और यही तो मकसद था। यह साबित करना कि मैं जितना सोचता हूं, उससे ज्यादा काबिल हूं।"
– कार्ल बुशबी, ब्रिटिश एडवेंचरर
कार्ल के शब्द सीधे हैं। वे इस यात्रा को खुद को साबित करने की कोशिश बताते हैं। क्या आपने कभी खुद को इतना आजमाया है?
दुनिया की सबसे लंबी पैदल यात्रा
कार्ल की यह यात्रा गोलियथ एक्सपेडिशन के नाम से जानी जाती है। इसे दुनिया भर की सबसे लंबी पैदल यात्रा यानी मानव इतिहास की सबसे लंबी निरंतर पैदल यात्राओं में गिना जाता है। यह कार्ल बुशबी की दुनिया घूमने की कहानी चार महाद्वीपों और 29 देशों से होकर गुजरी। इसकी दूरी करीब 31,000 मील यानी 50,000 किलोमीटर रही।
मां के घर लौटना उनके सख्त व्यक्तिगत संकल्प के पूरा होने का प्रतीक है। आंकड़ों में देखें तो यह यात्रा हैरान करती है। चैनल तैरने में तीन दिन लगे, जिसमें करीब 20 घंटे पानी में बीते। कैस्पियन सागर में 31 दिन लगे। अनुमान 12 साल का था, पर हकीकत में 28 साल लगे।

घर लौटकर अब क्या है नई चिंता?
हल पहुंचकर कार्ल को नई चिंता सता रही है। यह चिंता सामान्य जिंदगी में लौटने की है। जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा उन्होंने सफर में बिताया। 2 नवंबर 2026 को हल में एक नागरिक के हाथ में पानी की बोतल थी। उस पर कार्ल के हस्ताक्षर थे। यह पल शहर के लिए खास रहा।
जिस मां से मिलने के लिए यात्रा शुरू हुई, अब वे उनके पास पहुंच रहे हैं। मंजिल पूरी हो गई। लेकिन अब नया अध्याय शुरू करने की चुनौती सामने है, लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है।




















