सागर में जहरीली शराब से 22 मौतें, 100 से ज्यादा बीमार; मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

सागर। मौतों के बढ़ते आंकड़ों के बीच सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। वहीं डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के निलंबन की जानकारी दी है।
22 लोगों की मौत, 100 से ज्यादा बीमार
सागर में जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब तक जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग बीमार बताए जा रहे हैं। इनमें कई लोगों की हालत गंभीर है और उनका इलाज जारी है।
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कलेक्टर ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
मौतों के लगातार बढ़ते आंकड़ों के बीच सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन की ओर से घटना की परिस्थितियों और शराब के स्रोत की जांच की जा रही है। वहीं डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने कहा कि पूरे मामले की जांच हो रही है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।
अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
जगदीश देवड़ा ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित किया गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि शराब पीने की घटना को जाति के आधार पर देखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर सियासी रोटियां सेंकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और लाशों के ऊपर राजनीति नहीं करना चाहिए।
सरकार ने लोगों से मांगी जानकारी
डिप्टी सीएम ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं अवैध या जहरीली शराब बनाए जाने या बेचे जाने की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना सरकार और प्रशासन को दें। प्रशासन का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई जारी है। घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
उमंग सिंघार ने सरकार पर बोला हमला
गौरतलब है कि इससे पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सागर में जहरीली शराब से हो रही मौतों को लेकर सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश में लगातार हिंदुओं की मौत हो रही है और सरकार के जिम्मेदार अधिकारी जहरीली शराब के मामले में डिस्टलरी मालिकों को बचाने में लगे हैं। सिंघार ने आबकारी विभाग के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि विभाग ने पहले जहरीली शराब की बिक्री पर बैन लगाया और फिर उसे पीने योग्य बताया, तो बिक्री पर रोक क्यों नहीं लगाई गई। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी की थी।
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सस्ती शराब के कारोबार पर भी उठे सवाल
घटना के बाद अवैध शराब के कारोबार को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी शराब लाइसेंसी दुकानों से कम कीमत पर उपलब्ध होने के दावे सामने आए हैं। जांच में नकली शराब की बोतलों के रैपर और क्यूआर कोड के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कुछ शराब दुकानों को सील किया है।




















