रायपुर में पानी की किल्लत पर डिजिटल वार,15 टंकियां SCADA से जुड़ेंगी, स्मार्ट मीटर से तय होगा बिल

प्रेम कुमार,रायपुर: रायपुर में पानी की किल्लत, कम दबाव और जल बर्बादी की शिकायतों पर अब डिजिटल निगरानी की तैयारी है। नगर निगम शहर की 15 पानी की टंकियों को नए डूंडा फिल्टर प्लांट से जोड़कर SCADA सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इसके साथ ही करीब 72 हजार पानी के मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदलने और खपत के आधार पर बिलिंग की योजना है। यानी आने वाले समय में जितना पानी इस्तेमाल करेंगे, बिल भी उसी हिसाब से तय हो सकता है।
15 टंकियों पर लगेगी डिजिटल नजर
रायपुर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को हाईटेक बनाने के लिए नगर निगम जल विभाग 15 पानी की टंकियों को SCADA सिस्टम से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इन टंकियों को नए डूंडा फिल्टर प्लांट से जोड़े जाने की योजना है। इससे फिल्टर प्लांट से लेकर टंकियों और आगे वितरण नेटवर्क तक पानी की सप्लाई पर डिजिटल निगरानी संभव होगी।

SCADA बताएगा कहां कितना पानी पहुंचा
SCADA सिस्टम लागू होने के बाद कंट्रोल रूम से पानी के प्रवाह, दबाव और सप्लाई की स्थिति पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी। पाइपलाइन में लीकेज, तकनीकी खराबी या पानी की असामान्य बर्बादी सामने आने पर सिस्टम के जरिए इसकी जानकारी जल्द मिल सकेगी। इससे संबंधित अमले को खराबी वाले हिस्से की पहचान कर समय पर सुधार करने में मदद मिलेगी।

स्मार्ट मीटर से आएगा पानी का बिल
योजना का सबसे बड़ा बदलाव पानी की बिलिंग व्यवस्था में प्रस्तावित है। वर्तमान में शहर में करीब 72 हजार पानी के मीटर लगे हैं। इन्हें स्मार्ट मीटर में बदलने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में बिजली बिल की तर्ज पर पानी की वास्तविक खपत के आधार पर बिल तय किया जा सकता है।
ज्यादा पानी इस्तेमाल किया तो ज्यादा बिल
नई व्यवस्था लागू होने पर सामान्य सीमा से ज्यादा पानी खर्च करने वाले उपभोक्ताओं पर ज्यादा शुल्क का प्रावधान किया जा सकता है। इसका उद्देश्य सिर्फ राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को पानी की बचत के लिए प्रोत्साहित करना भी है।
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बिल जमा नहीं किया तो सप्लाई बंद करने का विकल्प
प्रस्तावित डिजिटल सिस्टम में बिलिंग के साथ कनेक्शन प्रबंधन की सुविधा भी जोड़े जाने की योजना है। बिल जमा नहीं करने वाले कनेक्शन पर सिस्टम के जरिए सप्लाई बंद करने की सुविधा प्रस्तावित है। हालांकि इसकी अंतिम प्रक्रिया और नियम निगम स्तर पर तय किए जाएंगे।

प्लांट से घर तक होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग
SCADA के जरिए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, मुख्य पाइपलाइन, पानी की टंकियों और वितरण नेटवर्क को एक डिजिटल निगरानी व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे कंट्रोल रूम में अधिकारियों को सप्लाई की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
लीकेज और बर्बादी पर भी कसेगा शिकंजा
शहर में पाइपलाइन लीकेज और पानी की बर्बादी बड़ी चुनौती बनी हुई है। SCADA सिस्टम से पानी के दबाव और प्रवाह में असामान्य बदलाव को ट्रैक करने में मदद मिलेगी। इससे संभावित लीकेज वाले क्षेत्रों की पहचान जल्द की जा सकेगी और पानी की बर्बादी कम करने की दिशा में कार्रवाई संभव होगी।
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426 करोड़ खर्च के बाद भी सवाल कायम
अमृत मिशन के तहत रायपुर की जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में पिछले वर्षों में करीब 426 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसके तहत लगभग 800 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने, 14 नई पानी की टंकियों के निर्माण और 22 पुरानी टंकियों के सुधार का काम कराया गया। करीब 70 हजार घरों को नल कनेक्शन से जोड़ने का भी दावा है।

स्मार्ट सिटी में भी करोड़ों का खर्च
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भी शहर में करीब 200 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने पर लगभग 130 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसके बावजूद रायपुर के कई इलाकों से कम दबाव, गंदे पानी और अनियमित जलापूर्ति की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में अब SCADA व्यवस्था से जमीनी समस्याओं की डिजिटल मॉनिटरिंग पर जोर दिया जा रहा है।
शहर में बनेंगी 10 नई पानी की टंकियां
जल विभाग शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर सर्वे करा रहा है। सर्वे में 10 नई पानी की टंकियों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इन टंकियों का निर्माण जल विभाग के माध्यम से कराया जाना प्रस्तावित है।

बल्क कनेक्शन पर भी मीटर अनिवार्य करने की तैयारी
कॉलोनियों और बड़े आवासीय परिसरों में बल्क कनेक्शन पर मीटर लगाने की तैयारी है। इसके बाद पानी की वास्तविक खपत के आधार पर बिलिंग की व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे बड़े कनेक्शन में पानी की खपत और संभावित बर्बादी पर निगरानी आसान होगी।
2.21 लाख नल कनेक्शन, अब खपत का हिसाब
रायपुर शहर में वर्तमान में कुल 2.21 लाख नल कनेक्शन दर्ज हैं। इनमें 2,13,346 आवासीय, 5,661 व्यावसायिक और 2,113 शासकीय व धार्मिक संस्थानों के कनेक्शन शामिल हैं। इतने बड़े नेटवर्क में डिजिटल मॉनिटरिंग लागू करना निगम के लिए बड़ी कवायद होगी।
निगम की तैयारी तेज
SCADA सिस्टम लागू करने के लिए नगर निगम में संबंधित कंपनियों के प्रेजेंटेशन कराए जाएंगे। इसके बाद सिस्टम की तकनीकी क्षमता, निगरानी व्यवस्था और जल वितरण नेटवर्क के साथ उसके एकीकरण को लेकर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
जल विभाग का पक्ष
जल विभाग के अध्यक्ष संतोष साहू के अनुसार शहर की 15 पानी की टंकियों को SCADA सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। इन टंकियों को नए डूंडा फिल्टर प्लांट से जोड़ा जाएगा। इससे पानी की सप्लाई और टंकियों की स्थिति की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।

अब सवाल—क्या बदलेगा आम उपभोक्ता के लिए?
नई व्यवस्था लागू होने पर उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा बदलाव खपत आधारित बिलिंग और पानी की निगरानी के रूप में सामने आ सकता है। वहीं निगम के सामने चुनौती यह होगी कि डिजिटल सिस्टम के साथ जमीनी स्तर पर लीकेज, कम दबाव और गंदे पानी जैसी पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।
नरसिंह फरेन्द्र, कार्यकारी अभियंता, फिल्टर प्लांट, नगर निगम रायपुर
स्काडा सिस्टम के माध्यम से पानी की सप्लाई की हाईटेक तरीके से मॉनिटरिंग की जाएगी। फिल्टर प्लांट से कितना पानी निकल रहा है, पानी की टंकियों तक कितना पानी पहुंच रहा है और आगे कितनी मात्रा में सप्लाई की जा रही है, इसकी डिजिटल रीडिंग और निगरानी की जा सकेगी। इस सिस्टम से पानी की खपत के साथ-साथ लीकेज और पानी की बर्बादी पर भी नजर रखी जाएगी। रायपुर स्मार्ट सिटी क्षेत्र में एटीएलएमडी का फिल्टर प्लांट भटगांव में स्काडा सिस्टम से जुड़ा हुआ है, लेकिन शहर की अन्य पानी टंकियों को भी इस सिस्टम से जोड़ने की योजना है। शहर की 15 पानी की टंकियों को नए डूंडा फिल्टर प्लांट से जोड़कर स्काडा सिस्टम के माध्यम से मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे फिल्टर प्लांट से लेकर पानी की टंकी और टंकी से घरों तक पानी की सप्लाई की स्थिति पर बेहतर तरीके से नजर रखी जा सकेगी। इसका उद्देश्य पानी की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

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अंशुल शर्मा, ईई, जल बोर्ड नगर निगम रायपुर
शहर में एक साथ सभी घरों में मीटरिंग करना संभव नहीं है और यह महंगा भी होगा। फिलहाल 24x7 वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए स्मार्ट वाटर मीटरों की टेस्टिंग की जा रही है। अभी तक 17 हजार से ज्यादा घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। पिछले तीन महीने की रीडिंग के आधार पर बिल का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके बाद उपभोक्ताओं को विकल्प दिया जाएगा कि वे सालाना एकमुश्त भुगतान करना चाहते हैं या हर महीने बिल देना चाहते हैं। घरेलू कनेक्शन के लिए सालाना 2400 रुपए की सीमा है, लेकिन वास्तविक खपत के आधार पर बिल इससे कम भी हो सकता है। फिलहाल गंज मंडी और मोतीबाग टंकी से इसकी शुरुआत की तैयारी है। वर्तमान में शहर में प्रतिदिन करीब 310 एमएलडी पानी की सप्लाई हो रही है। स्मार्ट मीटरिंग से पानी की बचत होने की उम्मीद है, हालांकि अभी बचत का सटीक आंकड़ा तय नहीं है। भविष्य में SCADA सिस्टम के जरिए पानी की सप्लाई को और बेहतर तरीके से नियंत्रित करने की तैयारी है।




















