कुंडली पढ़ना बन गया करियर!अब आप भी बन सकते हैं अगले महाशक्तिशाली ज्योतिषी, जानें कैसे?

क्या आप जानते हैं कि ज्योतिष अब सिर्फ भविष्य बताने का साधन नहीं, बल्कि एक करियर ऑप्शन बन चुका है? आज के युवा करियर से हटकर नए रास्तों की तलाश कर रहे हैं और एस्ट्रोलॉजी उनमें से सबसे तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। कुंडली पढ़ना, ग्रह-नक्षत्रों की जानकारी और सही मार्गदर्शन अब सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक प्रोफेशन बन गया है।
अब आप भी बन सकते हैं अगले महाशक्तिशाली ज्योतिषी, जानें कैसे?
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    आज के GenZ युवा करियर से हटकर नए और अलग रास्तों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में ज्योतिष विद्या (Astrology) एक ऐसा क्षेत्र बन गया है, जो न सिर्फ आध्यात्मिक संतोष देता है बल्कि सम्मानजनक और स्थिर करियर भी प्रदान करता है। अब कुंडली देखकर भविष्य बताना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक पेशेवर विकल्प बन चुका है। कोरोना के बाद लोगों का झुकाव ज्योतिष की ओर बढ़ा है। इसके चलते इस फील्ड में मांग तेजी से बढ़ी है और इसे आज एक उभरता हुआ करियर माना जा रहा है।

    ज्योतिष का महत्व और अवसर

    ज्योतिष कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक दृष्टि से जुड़ी विद्या है। यदि कोई युवा धैर्य, अनुशासन और अध्ययनशील मन लेकर इस क्षेत्र में आता है, तो वह एक सफल ज्योतिषी बन सकता है। आज दुनिया भर में ज्योतिष 50 बिलियन डॉलर से बड़ी इंडस्ट्री बन चुकी है। कुशल ज्योतिषियों की मांग हर जगह है, चाहे वह भारत हो या विदेश।

    ज्योतिष सीखने के लिए आवश्यक योग्यता

    किसी भी उम्र में ज्योतिष सीखना संभव है। इसके लिए आध्यात्मिक रुचि, ग्रह-नक्षत्रों में दिलचस्पी और मानव व्यवहार को समझने की जिज्ञासा जरूरी है। ऑनलाइन और ऑफलाइन कोर्स दोनों उपलब्ध हैं। वहीं अनुभवी गुरु से प्रशिक्षण लेने पर ज्ञान और भरोसा दोनों बढ़ते हैं।

    कोर्स और अध्ययन विकल्प

    1. UG डिप्लोमा इन ज्योतिष और वास्तुशास्त्र

    • अवधि: 2 साल
    • शुरुआती स्तर के लिए उपयुक्त है यहां छात्रों को ज्योतिष सिद्धांत, वास्तु नियम और उनका व्यवहारिक उपयोग सिखाया जाता है। 

    2. PG डिप्लोमा इन ज्योतिष और वास्तुशास्त्र

    • अवधि: 1 साल
    • बेसिक और एडवांस दोनों जानकारी दी जाती है। वास्तु सिद्धांत, ज्योतिषीय गणना और उनका जीवन में उपयोग सिखाया जाता है। 

    3. MA आचार्य- MA in Astrology

    • अवधि: 2 साल
    • ग्रह-नक्षत्रों की गति, कुंडली विश्लेषण और प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन होता है। वहीं आधुनिक दृष्टिकोण से ज्योतिष का व्यावहारिक उपयोग बताया जाता है।

    4. PhD in Astrology

    • अवधि: लगभग 3 साल
    • रिसर्च और नए दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्राचीन ग्रंथों, गणनाओं और आधुनिक शोध पद्धतियों पर काम करने के लिए अच्छा विकल्प है।

    प्रमुख संस्थान और कोर्स विकल्प

    1. भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली
    2. भारतीय विद्या भवन, मुंबई- ज्योतिष भारती कोर्स
    3. भारतीय विद्या भवन, बेंगलुरु केंद्र
    4. भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद केंद्र
    5. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)

    इन संस्थानों में डिप्लोमा, बैचलर, मास्टर्स और पीएचडी लेवल तक के कोर्स उपलब्ध हैं।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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