पश्चिम बंगाल की स्कूली किताबों में होंगे बड़े बदलाव, श्यामा प्रसाद मुखर्जी का चैप्टर जुड़ेगा; सिंगूर आंदोलन हटेगा

स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने संशोधित सिलेबस की जानकारी दी है, जिसे एक विशेष कमेटी ने तैयार किया है। इसके तहत पांचवीं से आठवीं तक कंप्यूटर और आईटी की पढ़ाई अनिवार्य विषय के रूप में शुरू होगी। वहीं, नई किताबों की शुरुआत वंदे मातरम् के पूरे पाठ से होगी और 2027 की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी की जगह मार्च में कराने का प्रस्ताव है।
किताबों में पढ़ाया जाएगा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन
पश्चिम बंगाल की स्कूली किताबों में अब भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उनके योगदान को जगह दी जाएगी। राज्य सरकार ने बंगाल के इतिहास और महान हस्तियों को प्रमुखता देने के लिए सिलेबस में बदलाव का फैसला किया है। स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन के मुताबिक, विशेष कमेटी ने संशोधित पाठ्यक्रम तैयार किया है।
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आठवीं से सिंगूर आंदोलन और छठी से कन्याश्री योजना का चैप्टर हटेगा
कमेटी की सिफारिश पर आठवीं कक्षा की किताब से सिंगूर में हुए भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का अध्याय हटाने का फैसला किया गया है। इसके अलावा छठी कक्षा की किताब से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार की चर्चित कन्याश्री योजना से जुड़ा चैप्टर भी हटाया जाएगा। इन बदलावों के जरिए पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है।
पांचवीं से आठवीं तक कंप्यूटर और IT की पढ़ाई होगी
स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर बनाने के लिए पांचवीं से आठवीं कक्षा तक कंप्यूटर और आईटी की पढ़ाई नियमित विषय के रूप में शुरू की जाएगी। इसके साथ ही सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा की किताबें भी तैयार की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में तकनीकी और भाषाई ज्ञान को बढ़ावा देना है।
हर नई किताब की शुरुआत वंदे मातरम् से होगी
पश्चिम बंगाल में अब नई स्कूली किताबों की शुरुआत वंदे मातरम् के पूरे पाठ से की जाएगी। इसके अलावा किताबों के पन्नों की गुणवत्ता में भी सुधार किया जाएगा। सरकार स्कूली शिक्षा में नो-डिटेंशन पॉलिसी यानी विद्यार्थियों को फेल नहीं करने की व्यवस्था को नौवीं कक्षा तक खत्म करने पर भी विचार कर रही है। मंत्री ने संकेत दिए हैं कि इस पर जल्द अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
2027 की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी की जगह मार्च में हो सकती हैं
पश्चिम बंगाल में 2027 में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव की संभावना है। इसी दौरान जनगणना का काम भी प्रस्तावित है, जिसमें सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। परीक्षा और जनगणना की तारीखों में टकराव से बचने के लिए बोर्ड ने परीक्षाएं आगे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
बोर्ड जल्द जारी करेगा परीक्षा का टाइम टेबल
बोर्ड परीक्षाओं को फरवरी की बजाय मार्च में कराने पर विचार किया जा रहा है। इससे परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है और विद्यार्थियों को नई तारीखों के अनुसार तैयारी करनी होगी। बोर्ड की ओर से कुछ ही दिनों में परीक्षा का टाइम टेबल जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।




















