जेल में हथकड़ी पहनकर दी परीक्षा, अब 12वीं रैंक के साथ DSP बने भिंड के जैनेंद्र निगम; पिता का सपना किया पूरा

मध्य प्रदेश के भिंड जिले के डोंगरपुरा गांव के रहने वाले जैनेंद्र कुमार निगम की कहानी संघर्ष, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है। कभी कानूनी मामलों के चलते जेल में रहकर परीक्षा देने वाले जैनेंद्र ने तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल कर DSP बनने की राह बनाई। उनकी इस सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपने पिता के उस सपने को पूरा किया, जो सालों की कोशिशों के बाद भी अधूरा रह गया था। एक किसान परिवार से आने वाले जैनेंद्र के लिए यह सफर आसान नहीं था। पारिवारिक परेशानियां, कानूनी मुकदमे, जेल में बिताया समय और परीक्षा के दौरान गंभीर बीमारी जैसी चुनौतियां उनके सामने आईं। लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से पीछे हटने के बजाय लगातार तैयारी की।
किसान परिवार से आते हैं जैनेंद्र निगम
जैनेंद्र कुमार निगम मध्य प्रदेश के भिंड जिले के डोंगरपुरा गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है। उनके पिता केशव कुमार निगम भी राज्य सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर चुके थे और DSP बनने का सपना देखते थे। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके पिता ने 1996 से 2000 के बीच पांच बार MPPSC की मुख्य परीक्षा दी। हालांकि, पारिवारिक परिस्थितियों और मुकदमों के कारण उनका सपना पूरा नहीं हो सका। पिता की इसी अधूरी इच्छा ने जैनेंद्र को प्रेरित किया। उन्होंने सरकारी सेवा में आगे बढ़ने का फैसला किया और DSP बनने को अपना अंतिम लक्ष्य बनाया। उनकी सफलता सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल करने की कहानी नहीं है, बल्कि परिवार के लंबे समय से चले आ रहे सपने के पूरा होने का भी प्रतीक है।
कई सरकारी परीक्षाओं में मिली सफलता
जैनेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत में कई सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सफलता हासिल की। हालांकि, उनका लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं था। वह प्रशासनिक और पुलिस सेवा में आगे बढ़ना चाहते थे।
- 2015: पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा पास की।
- 2017: सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा में सफलता हासिल की।
- 2019: शिक्षक भर्ती परीक्षा पास की, लेकिन नौकरी ज्वाइन नहीं की।
- MPPSC 2020: परीक्षा में सफलता के बाद नायब तहसीलदार के पद पर चयन हुआ।
- MPPSC 2022: सहायक संचालक, स्कूल शिक्षा के पद पर चयन हुआ।
- MPPSC 2023: 12वीं रैंक हासिल कर DSP बनने की दिशा में बड़ी सफलता प्राप्त की।
जब जेल में रहते हुए देनी पड़ी MPPSC की परीक्षा
जैनेंद्र के जीवन का सबसे मुश्किल दौर 2019-20 के आसपास आया। पारिवारिक विवाद और कानूनी मामलों के चलते उन्हें जेल में रहना पड़ा। उनके मुताबिक, उन्हें दो बार जेल जाना पड़ा था। इस दौरान उनके लिए पढ़ाई जारी रखना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने जेल में रहते हुए भी MPPSC की परीक्षा दी। परीक्षा के दिन पुलिसकर्मी उन्हें हथकड़ी लगाकर परीक्षा केंद्र तक लेकर पहुंचे थे। जनवरी 2021 में जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने इंदौर जाकर दोबारा तैयारी शुरू की। उन्होंने खुद पढ़ाई की, नोट्स बनाए और नियमित रूप से टेस्ट देकर अपनी कमजोरियों को दूर करने पर काम किया।
जेल से बाहर आने के बाद ऐसे बदली अपनी जिंदगी
जेल से बाहर आने के बाद जैनेंद्र ने अपनी तैयारी को नए सिरे से व्यवस्थित किया। उन्होंने पढ़ाई के लिए समय निर्धारित किया और प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न को समझते हुए अभ्यास जारी रखा।
- सेल्फ स्टडी: खुद पढ़ाई करके विषयों की समझ मजबूत की।
- नोट्स तैयार करना: महत्वपूर्ण विषयों और तथ्यों को दोहराने के लिए नोट्स बनाए।
- नियमित टेस्ट: अपनी तैयारी का आकलन करने के लिए लगातार अभ्यास किया।
- लक्ष्य पर फोकस: दूसरी उपलब्धियों के बावजूद DSP बनने की दिशा में मेहनत जारी रखी।
उनकी कहानी दिखाती है कि कठिन परिस्थितियों के बाद दोबारा शुरुआत करना आसान नहीं होता, लेकिन स्पष्ट लक्ष्य और नियमित प्रयास आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।
MPPSC परीक्षा के दौरान मलेरिया और टाइफाइड से जूझे
जैनेंद्र की चुनौतियां DSP बनने की राह में भी खत्म नहीं हुईं। MPPSC 2023 की मुख्य परीक्षा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें मलेरिया और टाइफाइड हो गया था। बीमारी के बावजूद उन्होंने 11 से 16 मार्च 2024 के बीच आयोजित मुख्य परीक्षा दी। बताया जाता है कि इलाज के दौरान सुबह-शाम ड्रिप लगवाने के बावजूद वह परीक्षा में शामिल होते रहे। यह दौर उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से कठिन रहा होगा। फिर भी उन्होंने परीक्षा पूरी की और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।



















