VIT University Case: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने UGC और उच्च शिक्षा विभाग को भेजा नोटिस

भोपाल। वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) भोपाल विश्वविद्यालय से जुड़े मामले में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है। बता दें, मामला भोपाल विश्वविद्यालय के नाम और उसके वास्तविक भौगोलिक स्थान सीहोर को लेकर जुड़ा है। मामले में आयोग ने चार सप्ताह के भीतर पुनः अतिरिक्त रिपोर्ट एवं कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 29 नवंबर 2026 दी गई है।
‘भोपाल’ शब्द का इस्तेमाल कर भ्रम
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार द्वारा की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय अपने नाम में ‘भोपाल’ शब्द का इस्तेमाल कर विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में विश्वविद्यालय की लोकेशन को लेकर भ्रम पैदा कर रहा है, जबकि उसका मुख्य परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। बाद में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को परेशानी होती है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं । रवि परमार ने मांग की है कि विश्वविद्यालय के नाम और वास्तविक लोकेशन के संबंध में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को स्पष्ट, सटीक और भ्रामकता से मुक्त जानकारी उपलब्ध कराई जाए। संगठन ने यह भी मांग की है कि परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक के संचालन और अशांति से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोष पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ये भी पढ़ें: VIT यूनिवर्सिटी पर फिर सवाल! टाइफाइड से 250 से ज्यादा छात्र बीमार, जांच के घेरे में पूरा कैंपस
यूनिवर्सिटी की लोकेशन पर सवाल
आयोग ने सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय के वैधानिक नाम और वास्तविक स्थान के बीच करीब 100 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद क्या विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के मन में लोकेशन को लेकर गलत धारणा बन सकती है। राज्य सरकार की रिपोर्ट में इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक संचालित होने और पूर्व में अशांति की घटनाओं के आरोप भी उठाए गए थे। आयोग ने कहा कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच के संबंध में कोई उल्लेख नहीं है।
यूजीसी की भूमिका पर भी टिप्पणी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि 30 मार्च 2026 और 5 जून 2026 को निर्देश जारी किए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। आयोग ने यूजीसी के अध्यक्ष को कथित भ्रामक नामकरण के संबंध में की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है वहीं, मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को भी मामले में अतिरिक्त रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संबंधित अतिरिक्त एवं पूर्ण प्रतिवेदन 29 नवंबर 2026 तक प्रस्तुत करने को कहा है।
ये भी पढ़ें: सीहोर : VIT कॉलेज में छात्रों का हंगामा, बस फूंकी, खराब भोजन सहित कई मांगो पर 4000 छात्र इकट्ठा हुए




















