सूरज के सबसे करीब बसा यह गांव,फिर भी सालभर पड़ती है कड़ाके की ठंड; वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

अगर आप सोचते हैं कि दुनिया में सूरज के सबसे करीब मौजूद जगह सबसे गर्म होगी, तो यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर में स्थित माउंट चिम्बोराजो (Mount Chimborazo) की ढलानों पर बसे कई गांव इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी के केंद्र से मापने पर चिम्बोराजो की चोटी धरती का वह बिंदु है, जो अंतरिक्ष और सूरज के सबसे करीब माना जाता है। इसके बावजूद यहां सालभर कड़ाके की ठंड पड़ती है और ऊंची चोटियां हमेशा बर्फ से ढकी रहती हैं।
एवरेस्ट नहीं, चिम्बोराजो है अंतरिक्ष के सबसे करीब
समुद्र तल से देखें तो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848.86 मीटर है, जबकि माउंट चिम्बोराजो लगभग 6,263 मीटर ऊंचा है। फिर भी चिम्बोराजो की चोटी पृथ्वी के केंद्र से अधिक दूरी पर स्थित है। इसकी वजह यह है कि पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं, बल्कि भूमध्य रेखा के आसपास उभरी हुई (Oblate Spheroid) है। चिम्बोराजो भूमध्य रेखा के बेहद करीब होने के कारण इसकी चोटी अंतरिक्ष के सबसे निकट मानी जाती है।
ऊंची ढलानों पर बसे हैं कई गांव
चिम्बोराजो की ढलानों पर लगभग 3,500 से 4,200 मीटर की ऊंचाई के बीच कई छोटे गांव बसे हैं। यहां क्वेशुआ (Quechua) और पुरुहा (Puruhá) समुदाय के लोग पीढ़ियों से रह रहे हैं। कम ऑक्सीजन, तेज हवाओं और बेहद ठंडे मौसम के बावजूद इन लोगों ने अपने जीवन को इसी वातावरण के अनुरूप ढाल लिया है। वे खेती, पशुपालन और पारंपरिक हस्तशिल्प के जरिए आजीविका चलाते हैं।
मिट्टी के घर और ऊनी कपड़े हैं ठंड से बचाव का सहारा
स्थानीय लोग मोटी मिट्टी की दीवारों वाले पारंपरिक घरों में रहते हैं, जिनकी छत सूखी घास से ढकी होती है। इससे घर के भीतर गर्माहट बनी रहती है। भोजन में आलू, चीज, सूप, जड़ी-बूटियों की चाय और मांस प्रमुख हैं। यहां लामा, अल्पाका और विकुना जैसे जानवरों की ऊन से गर्म कपड़े, शॉल और पारंपरिक पोंचो तैयार किए जाते हैं, जो ठंड से बचाने में मदद करते हैं।
पहाड़ को मानते हैं अपना रक्षक
स्थानीय समुदाय माउंट चिम्बोराजो को केवल पर्वत नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक मानता है। लोग इसे "पिता चिम्बोराजो" कहकर संबोधित करते हैं और मान्यता है कि यह पर्वत पूरे क्षेत्र की रक्षा करता है। खेती शुरू करने या किसी नए कार्य से पहले लोग इसकी पूजा कर आशीर्वाद मांगते हैं। यहां 'हिएलेरोस' (Hieleros) की परंपरा भी प्रसिद्ध रही है। पहले लोग पहाड़ से ग्लेशियर की बर्फ काटकर नीचे शहरों तक पहुंचाते थे और उसे बेचकर आजीविका कमाते थे। आधुनिक तकनीक आने के बाद यह परंपरा लगभग समाप्त हो गई, लेकिन कुछ परिवार आज भी इसे सांस्कृतिक विरासत के रूप में निभा रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही चिंता
ग्लोबल वार्मिंग का असर अब चिम्बोराजो क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। ग्लेशियर लगातार सिकुड़ रहे हैं, जिससे भविष्य में पानी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, युवा शिक्षा और रोजगार के लिए शहरों की ओर जा रहे हैं। हालांकि कई स्थानीय लोग अब पर्यटन, ट्रैकिंग गाइड और ऊनी हस्तशिल्प के जरिए आय के नए स्रोत भी विकसित कर रहे हैं। इस तरह चिम्बोराजो के आसपास का जीवन आज परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम बन चुका है।












