भगोड़ा और धोखेबाज कहे जाने पर भड़के विजय माल्या! रिकवरी के आंकड़े दिखाकर सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली। कारोबारी विजय माल्या एक बार फिर चर्चा में हैं। माल्या ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट शेयर कर खुद को बेगुनाह बताया है। उनका दावा है कि उन्हें भारत लौटने से जानबूझकर रोका नहीं जा रहा, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के कारण वह ब्रिटेन में बने हुए हैं। माल्या ने यह भी कहा कि उन्हें ब्रिटेन छोड़ने की अनुमति नहीं है। हालांकि, भारत में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है। सरकार के मुताबिक, विजय माल्या उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत इस श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में माल्या के नए दावों ने एक बार फिर उनके मामले को चर्चा में ला दिया है।
‘मैं 1992 से ब्रिटेन का स्थायी निवासी हूं’
विजय माल्या ने सोशल मीडिया पोस्ट में उन लोगों को जवाब दिया, जो उन्हें भारत से भागने वाला व्यक्ति बताते हैं। उन्होंने दावा किया कि वह वर्ष 1992 से यूनाइटेड किंगडम के स्थायी निवासी हैं। माल्या के मुताबिक, फिलहाल कानूनी कारणों से वह ब्रिटेन नहीं छोड़ सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने उनके मामले में उनके खिलाफ ऐसा माहौल बनाया, जिसकी वजह से उन्हें ‘पोस्टर बॉय’ की तरह पेश किया गया। माल्या ने अपने पोस्ट में सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है।
सरकार की नजर में भगोड़ा आर्थिक अपराधी
माल्या के दावों के बीच सरकार का पक्ष अलग है। अक्टूबर 2025 में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया था कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। इस सूची में विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे नाम भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में देश से बाहर मौजूद आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लाने की कोशिश जारी है।
भारत वापस लाने को लेकर सरकार का रुख साफ
विदेश मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भारत सरकार विदेशों में मौजूद वांछित भगोड़ों को वापस लाने और उन्हें भारतीय अदालतों में मुकदमे का सामना कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के मुताबिक, ऐसे मामलों में प्रत्यर्पण और दूसरी कानूनी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इसलिए किसी व्यक्ति को वापस लाने की प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं होती। इसके बावजूद सरकार ने आर्थिक अपराधियों को भारत वापस लाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
माल्या ने ED की रिकवरी पर उठाए सवाल
विजय माल्या ने अपने हालिया पोस्ट में कथित हलफनामे के एक हिस्से का भी जिक्र किया। उनका दावा है कि प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में उनके कर्ज और रिकवरी से जुड़ी रकम का उल्लेख किया गया है। माल्या ने दावा किया कि वर्ष 2021 में 14,131.60 करोड़ रुपये की रिकवरी दिखाई गई थी। इसके बावजूद उनका कहना है कि कई साल बाद भी उन्हें धोखाधड़ी करने वाला व्यक्ति कहा जाता है। हालांकि, ये माल्या की ओर से किए गए दावे हैं और उनके मामले में अदालतों की कार्यवाही अलग से जारी रही है।
‘ED ने जब्त फंड से कर्मचारियों को दिए 350 करोड़’
माल्या ने अपनी पोस्ट में यह भी दावा किया कि ED ने उनके जब्त किए गए फंड में से 350 करोड़ रुपये से अधिक की रकम किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों को भुगतान के लिए जारी की थी। माल्या का कहना है कि यदि उनकी संपत्तियां और फंड जब्त नहीं किए जाते तो वह खुद भी भुगतान कर सकते थे। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर अपने आलोचकों से दस्तावेजों और रिकवरी के आंकड़ों की स्वतंत्र जांच करने की अपील की।
6203 करोड़ के कर्ज पर भी माल्या का दावा
अगस्त में भी विजय माल्या ने बैंकों से हुई रिकवरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि बैंकों और सरकार ने करीब 6,203 करोड़ रुपये के कोर्ट-ऑर्डर वाले कर्ज के मुकाबले 14,100 करोड़ रुपये की वसूली की है। माल्या ने इसे लेकर भारतीय कर्ज समाधान व्यवस्था पर भी सवाल उठाया था। उनका कहना था कि जब उनसे बकाया रकम से काफी ज्यादा पैसा वसूल किया जा चुका है, तो फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिला।
बॉम्बे हाई कोर्ट में भी मामला जारी
विजय माल्या की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। बॉम्बे हाई कोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई हुई है, जिसमें उन्होंने भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून और खुद को भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया को चुनौती दी है। फरवरी 2026 में कोर्ट ने माल्या को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि कोई व्यक्ति अदालत की कार्यवाही से दूर रहता है तो वह उसी अदालत से राहत की उम्मीद नहीं कर सकता। कोर्ट ने माल्या से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि क्या वह भारत लौटने के इच्छुक हैं। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली बेंच ने की।
अब माल्या के दावे पर सबकी नजर
विजय माल्या लगातार सोशल मीडिया के जरिए अपने पक्ष को सामने रख रहे हैं। वह रिकवरी, जब्त संपत्तियों और भारत लौटने से जुड़े कानूनी मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, भारत सरकार और अदालतों की कार्रवाई अपने कानूनी ढांचे के तहत जारी है।



















