यहां पैदा होती हैं लड़कियां, लेकिन 12 की उम्र में बन जाती हैं लड़के! क्या है इस गांव का रहस्य?

दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जहां से जुड़ी घटनाएं लोगों को हैरान कर देती हैं। ऐसी ही एक कहानी डोमिनिकल रिपब्लिक के ला सेलिनास गांव से सामने आई थी। यहां कुछ बच्चे जन्म के समय लड़की के रूप में दिखाई देते थे, लेकिन किशोरावस्था के दौरान उनके शरीर में पुरुषों से जुड़े शारीरिक बदलाव नजर आने लगते थे। इसी वजह से लंबे समय तक स्थानीय लोग इसे किसी रहस्य या श्राप से जोड़कर देखते रहे। हालांकि, मेडिकल रिसर्च के अनुसार यह किसी श्राप या जादू का मामला नहीं, बल्कि एक दुर्लभ स्थिति से जुड़ा है। इस स्थिति को 5-अल्फा रिडक्टेज डेफिशिएंसी (5-alpha reductase deficiency) कहा जाता है। यह स्थिति उन बच्चों में पाई जाती है जिनके क्रोमोसोम XY होते हैं, लेकिन जन्म के समय उनके बाहरी जननांग पूरी तरह पुरुषों जैसे विकसित नहीं होते।
जन्म के समय लड़की समझे जाते हैं बच्चे
इस स्थिति से प्रभावित बच्चों के बाहरी शारीरिक लक्षण जन्म के समय ऐसे हो सकते हैं कि उन्हें लड़की समझ लिया जाए। परिवार और समाज भी उसी आधार पर उनकी पहचान तय कर देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है और किशोरावस्था में पहुंचता है, शरीर में पुरुष हार्मोन से जुड़े बदलाव ज्यादा स्पष्ट होने लगते हैं। कुछ मामलों में आवाज भारी होना, मांसपेशियों का विकास और पुरुष जननांगों से जुड़े बदलाव दिखाई दे सकते हैं। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर यह धारणा बनी कि गांव में लड़कियां बड़ी होने के बाद लड़कों में बदल जाती हैं।
गांव को माना जाने लगा 'श्रापित'
ला सेलिनास की इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय तक डर और अंधविश्वास की स्थिति रही। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ परिवारों में लड़की के जन्म को लेकर चिंता जताई जाती थी, क्योंकि उन्हें आशंका रहती थी कि बच्ची के बड़े होने पर उसके शरीर में असामान्य बदलाव हो सकते हैं। इसी धारणा ने गांव को कथित तौर पर ‘श्रापित गांव’ जैसी पहचान दे दी। बाद में वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने इन मामलों का अध्ययन किया और इसके पीछे आनुवांशिक कारणों को समझने की कोशिश की।
क्या है 5-अल्फा रिडक्टेज डेफिशिएंसी?
5-अल्फा रिडक्टेज डेफिशिएंसी एक दुर्लभ आनुवांशिक स्थिति है। शरीर में 5-अल्फा रिडक्टेज नाम का एंजाइम टेस्टोस्टेरोन को डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन (DHT) में बदलने में मदद करता है। DHT पुरुष जननांगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि इस एंजाइम की कमी हो, तो गर्भावस्था के दौरान पुरुष भ्रूण के बाहरी जननांगों का विकास सामान्य तरीके से नहीं हो पाता। ऐसे बच्चे जन्म के समय महिला जैसे बाहरी जननांगों के साथ दिखाई दे सकते हैं। किशोरावस्था में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ने पर शरीर में पुरुषों से जुड़े कुछ बदलाव अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।
'जेंडर चेंज' कहना पूरी तरह सही नहीं
ला सेलिनास से जुड़ी कहानियों में अक्सर कहा जाता है कि यहां लड़कियां बड़ी होकर लड़के बन जाती हैं। हालांकि, मेडिकल नजरिए से इसे इस तरह समझना सही नहीं है। यह किसी व्यक्ति का अचानक एक जेंडर से दूसरे जेंडर में बदल जाना नहीं है, बल्कि जन्म से मौजूद एक आनुवांशिक और जैविक स्थिति के कारण शरीर के विकास में अंतर होता है। इस स्थिति को समझने में वैज्ञानिकों के लिए ऐसे मामले महत्वपूर्ण रहे हैं, क्योंकि इससे मानव शरीर में सेक्स डेवलपमेंट और हार्मोन की भूमिका को समझने में मदद मिली।
Raipur: छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू का बढ़ता दायरा,10 नए केस से हड़कंप,मरीजों की संख्या 115 पहुंची
दशकों से वैज्ञानिकों की दिलचस्पी
ला सेलिनास के मामलों ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा। यहां सामने आए मामलों के कारण शोधकर्ताओं को यह समझने का मौका मिला कि जीन, हार्मोन और शरीर के विकास के बीच किस तरह का संबंध होता है। आज इस गांव की कहानी को केवल किसी 'रहस्यमयी' या 'श्रापित' जगह की कहानी के तौर पर देखना सही नहीं होगा। इसके पीछे एक दुर्लभ आनुवांशिक स्थिति है, जिसने इस छोटे से गांव को मेडिकल रिसर्च के इतिहास में खास पहचान दिलाई।




















