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UP Weather :उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान 25 प्रतिशत कम बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में एक जून से 29 जुलाई के बीच 258.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 342.8 मिलीमीटर होती है।
उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान 25 प्रतिशत कम बारिश
उत्तर प्रदेश के मानसून में अब तक सामान्य से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून में अब तक सामान्य से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मौसम विभाग ने अगस्त की शुरुआत में मानसून के फिर सक्रिय होने का अनुमान जताया है, लेकिन वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और बुआई की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में एक जून से 29 जुलाई के बीच 258.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 342.8 मिलीमीटर होती है।

इस प्रकार राज्य में सामान्य से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस अवधि के दौरान राज्य में सबसे कम 252.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 370.4 मिलीमीटर होती है। इस प्रकार पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 32 प्रतिशत कम बारिश हुई। 

किस जिले में क्या स्थिति

भदोही, देवरिया, जौनपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, कुशीनगर, रायबरेली, संत कबीर नगर और सीतापुर समेत कई जिलों में बारिश की कमी 50 प्रतिशत से अधिक रही। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में लंबे समय से शुष्क स्थिति बने रहने का संकेत है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जहां सामान्य 304.2 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 267 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस प्रकार बारिश में 12 प्रतिशत की कमी रही। हालांकि, बारिश हर जगह एक समान नहीं हुई। मेरठ, मुजफ्फरनगर और संभल में मानसून के दौरान अत्यधिक बारिश हुई, जबकि गौतम बुद्ध नगर, पीलीभीत, शामली और अमरोहा में लगातार काफी कम बारिश दर्ज की गई।

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फसलों की वृद्धि हो सकती है प्रभावित

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में धान की रोपाई तथा मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलों की बुआई के लिए जुलाई महत्वपूर्ण महीना होता है। यहां स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी रामेन्द्र कुशवाहा ने कहा, 'बारिश में लगातार कमी, विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में, फसलों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है क्योंकि इस क्षेत्र में खेती का बड़ा हिस्सा वर्षा पर निर्भर है। इससे सिंचाई पर निर्भरता और किसानों की लागत बढ़ सकती है।' हालांकि, मौसम विभाग ने कहा कि अगस्त के पहले सप्ताह में मानसून के फिर सक्रिय होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरे दबाव का क्षेत्र मध्य छत्तीसगढ़ और उससे सटे ओडिशा के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ा है, जिससे मध्य भारत में मानसून की गतिविधियां तेज हो रही हैं।

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अगस्त के शुरुआती दिनों होगी तेज बारिश

मौसम विज्ञान ने कहा कि इस मौसम प्रणाली के कमजोर पड़ने के बाद मानसून के उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे अगस्त के शुरुआती दिनों में पूरे राज्य में इसकी गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं। बारिश में कुछ समय के लिए आई कमी के बावजूद इस सप्ताह के अंत तक तापमान में अधिक वृद्धि होने की संभावना नहीं है क्योंकि तेज हवाएं चलने से तापमान नियंत्रित रहेगा।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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