बैंक ऑफ बड़ौदा में 5 करोड़ का लोन घोटाला,11 फर्जी फर्मों से बैंक को चूना, तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत 2 पर चार्जशीट

रायपुर: छत्तीसगढ़ में बैंकिंग व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाले 5 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी लोन घोटाले में ईओडब्ल्यू-एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है। बैंक ऑफ बड़ौदा की बिलासपुर स्थित राजकिशोर नगर शाखा से 11 फर्जी फर्मों के नाम पर 5.04 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत कराकर बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के मामले में तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और विश्वजीत भौमिक के खिलाफ चालान पेश किया गया है। एजेंसी ने 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर में चालान क्रमांक 84/2026 प्रस्तुत किया।
11 फर्जी फर्में बनाकर निकाले 5 करोड़ से ज्यादा
ईओडब्ल्यू-एसीबी की जांच में सामने आया कि 11 ऐसी फर्मों के नाम पर बैंक से कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन की सुविधाएं ली गईं, जिनकी वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां मौके पर नहीं मिलीं। इन खातों में स्वीकृत ऋण की कुल राशि 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रुपये थी। बाद में सभी 11 ऋण खाते वर्ष 2019 में एनपीए हो गए और बैंक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
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छोटे लोन दिलाने के बहाने जुटाए लोगों के दस्तावेज
जांच के मुताबिक, विश्वजीत भौमिक बिलासपुर के जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय से लोगों को छोटे ऋण दिलाने और बैंकों से लोन उपलब्ध कराने का काम करता था। इस दौरान वह ऋण लेने के इच्छुक लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, केवाईसी दस्तावेज और संपत्ति के मूल कागजात हासिल करता था। इसके साथ ही बैंक के प्रपत्रों और खाली चेकों पर भी हस्ताक्षर करा लेता था।
लोगों को पता तक नहीं चला और बन गईं फर्जी कंपनियां
ईओडब्ल्यू-एसीबी की विवेचना में खुलासा हुआ कि जुटाए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल संबंधित लोगों की जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम पर फर्में बनाने के लिए किया गया। कुछ फर्मों में भौमिक ने अपने कर्मचारियों को प्रोपराइटर के रूप में दर्शाया था। तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि इन प्रमाणपत्रों को भौमिक के निर्देश पर उसके कार्यालय में तैयार किया गया था। सात फर्मों के जीएसटी रिटर्न भी उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय से दाखिल किए गए थे।
बैंक मैनेजर पर नियमों को दरकिनार कर लोन देने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, 20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंक के निर्धारित नियमों और परिपत्रों की अनदेखी करते हुए 11 अपात्र फर्मों को अलग-अलग ऋण सुविधाएं स्वीकृत कीं। ऋण के लिए ऐसी संपत्तियों को भी बंधक स्वीकार किया गया, जिनका संबंधित ऋण लेने वालों से कोई संबंध नहीं था। ऋण स्वीकृति से पहले तैयार निरीक्षण रिपोर्ट में फर्मों के व्यवसाय और पते को लेकर गलत जानकारियां दर्ज की गई थीं। एक फर्म का व्यावसायिक पता वास्तव में विश्वजीत भौमिक का तत्कालीन निवास निकला।
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कारोबार के बजाय दूसरे खातों में पहुंची लोन की रकम
विवेचना में पता चला कि बैंक से मिली ऋण राशि का इस्तेमाल संबंधित फर्मों के वास्तविक कारोबार में नहीं किया गया। रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर निकाला गया। जांच में विश्वजीत भौमिक को इसका अंतिम लाभार्थी पाया गया। एजेंसी के अनुसार, बैंक से प्राप्त ऋण की रकम राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) के माध्यम से भौमिक की अपनी फर्म एबी फास्टनर्स तक पहुंचाई गई। इसके अलावा कूटरचित बिलों के आधार पर एनएसआईसी रायपुर से भी भुगतान प्राप्त किया गया।
बैंक के निरीक्षण में नहीं मिलीं फर्मों की वास्तविक इकाइयां
बैंक की ओर से किए गए निरीक्षण के दौरान मौके पर किसी भी फर्म की वास्तविक व्यावसायिक इकाई नहीं मिली। इसके बाद ऋण खातों की स्थिति और भुगतान की जांच में सामने आया कि सभी 11 खाते वर्ष 2019 में ही एनपीए हो गए थे। ऋण की अदायगी नहीं होने के कारण बैंक को कुल 5,04,15,000 रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
किन धाराओं में दाखिल हुई चार्जशीट?
ईओडब्ल्यू-एसीबी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 12 एवं 13(2) के तहत चालान पेश किया है। आरोपियों को विश्वजीत भौमिक: निवासी विवेकानंद नगर, मोपका, बिलासपुर।राहुल कुमार सिन्हा: बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक। जांच एजेंसी के अनुसार, राहुल कुमार सिन्हा वर्तमान में गुजरात के कच्छ जिले की गढ़सीसा शाखा में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं।
2020 में दर्ज हुआ था मामला, अब अदालत में पहुंची जांच
बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर से मिली शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू-एसीबी ने 28 जनवरी 2020 को अपराध क्रमांक 04/2020 दर्ज किया था। करीब छह साल की विवेचना के बाद एजेंसी ने 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय, बिलासपुर में चालान पेश किया है। अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया अदालत में चलेगी।
निष्कर्ष: 11 फर्जी फर्मों के जरिए बैंक से करोड़ों रुपये का ऋण हासिल करने के इस मामले ने बैंकिंग प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन और ऋण स्वीकृति के दौरान निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा।




















