MP में 55 'प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' का शुभारंभ, अमित शाह ने कहा- स्टूडेंट्स रुचि के अनुसार काम करने की क्षमता देंगे

इंदौर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों के लिए ‘‘पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस'' का ऑनलाइन माध्यम से उद्घाटन किया। मुख्य कार्यक्रम इंदौर के अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में हुआ, जिसे ‘पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया गया है।
अमित शाह ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थी के अंदर की सभी शक्तियों को बाहर निकाल कर विकसित करना है और प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों में अपनी रुचि के अनुसार काम करने की क्षमता देंगे। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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गृहमंत्री अमित शाह ने प्रदेश के 55 जिलों में 'पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' का वर्चुअल शुभारंभ किया।[/caption]
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गृहमंत्री अमित शाह ने प्रदेश के 55 जिलों में 'पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' का वर्चुअल शुभारंभ किया।[/caption]
शिक्षा की नींव मजबूत करना जरूरी : शाह
समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि आज एक ही दिन में एक ही नगर इंदौर में 11 लाख वृक्ष लगाने का रिकॉर्ड बनाया गया है। जो विद्यार्थी इस अभियान से छूट गए हैं, वो अपने घर के पास ही एक पौधा लगाएं और उसकी देखभाल करें। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भर में 55 कॉलेजों को 'प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस' के तौर पर विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हम सब के लिए एक लक्ष्य रखा है कि 2047 में हमारा लक्ष्य हर क्षेत्र में विश्व भर में प्रथम रहना है। ऐसा भारत शिक्षा की नींव मजबूत किए बिना नहीं बनाया जा सकता।MP ने सबसे पहले नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारा
नई शिक्षा नीति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ये नीति न केवल भारत के विद्यार्थियों को दुनिया भर के विद्यार्थियों से प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बनाएगी, बल्कि विद्यार्थियों को हमारी प्राचीनतम संस्कृति और भाषाओं के साथ भी जोड़ेगी। उन्होंने प्रदेश सरकार को बधाई देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश ने सबसे पहले नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उनके उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए वे (शाह स्वयं) एक कार्यक्रम में आए थे और उस दौरान प्रदेश वो पहला राज्य बना, जिसने इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई मातृभाषा (हिंदी) में कराना शुरू किया।
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