Garima Vishwakarma
27 Jan 2026
नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच चेन्नई–व्लादिवोस्तोक ईस्टर्न कॉरिडोर को लेकर अहम चर्चा हुई। जिसके तहत यह नया समुद्री मार्ग भारत–रूस की दूरी को लगभग आधा कर देगा। फिलहाल भारत से रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचने में जहाजों को करीब 16,060 किमी की यात्रा और लगभग 40 दिन लगते हैं। लेकिन प्रस्तावित चेन्नई–व्लादिवोस्तोक रूट सिर्फ 10,370 किमी का होगा, जिससे जहाज 24 दिन में रूस पहुंच सकेंगे।
यानी रास्ता करीब 5,700 किमी छोटा होगा और सीधे 16 दिन की बचत मिलेगी। नया कॉरिडोर दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सप्लाई और रणनीतिक कनेक्टिविटी को तेज़ करने वाला सबसे बड़ा शॉर्टकट साबित हो सकता है।
पुतिन और पीएम मोदी की 5 दिसंबर की बैठक में चेन्नई–व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग को जल्द ऑपरेशनल करने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं का मानना है कि बढ़ते वैश्विक तनाव और अनिश्चित शिपिंग रूट्स के बीच यह नया कॉरिडोर भारत–रूस के लिए एक और सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर सकता है।
इसी वार्ता में भारत और रूस ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग 60 अरब डॉलर का व्यापार होता है। नया सी-रूट इस ट्रेड वॉल्यूम को तेजी से बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इस कॉरिडोर के शुरू होने से चेन्नई से मलक्का खाड़ी, दक्षिण चीन सागर और जापान सागर होते हुए व्लादिवोस्तोक पहुंचने में लगने वाले पूरे रूट से सीधे 16 दिन की बचत होगी। दूरी कम होने के साथ ही यह मार्ग सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से भी बेहतर माना जा रहा है। आने वाले समय में यही रूट भारत–रूस व्यापार को नई दिशा देने वाला गेमचेंजर साबित हो सकता है।
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि यह कॉरिडोर चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। जैसे ही यह सक्रिय होगा, तेल, गैस, कोयला, मशीनरी और धातु जैसे प्रमुख व्यापार सेक्टर्स में तेज़ी आएगी। इससे न सिर्फ भारत की सप्लाई चेन मजबूत होगी, बल्कि रूस के सुदूर पूर्व से कनेक्टिविटी भी पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगी।