Aakash Waghmare
27 Jan 2026
Manisha Dhanwani
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Shivani Gupta
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संसद के शीतकालीन सत्र का सोमवार (8 दिसंबर) को छठा दिन है। लोकसभा में देश के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' पर लंबी चर्चा होने जा रही है। इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गीत हमारे स्वतंत्रता संग्राम को ऊर्जा और प्रेरणा देने वाला रहा है। यह त्याग और तपस्या का प्रतीक भी है।
हमारे बहादुर स्वतंत्रता सेनानी बिना डर के फांसी के तख्ते पर चढ़ जाते थे और आखिरी सांस तक वंदे मातरम् कहते रहते थे। खुदीराम बोस, अशफ़ाक उल्ला ख़ान, राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह और राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जैसे अनगिनत वीरों ने वंदे मातरम् कहते हुए फांसी को हँसकर गले लगाया। वे भले अलग-अलग जेलों में थे, लेकिन सबके दिल में एक ही मंत्र था—वंदे मातरम्।
1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया। उनका उद्देश्य भारत को कमजोर करना था, लेकिन वंदे मातरम् इस समय चट्टान की तरह लोगों के साथ खड़ा रहा। यह नारा गली-गली में गूंजने लगा और बंगाल की एकता की आवाज बन गया। अंग्रेजों के लिए यह चुनौती था, जबकि देशवासियों के लिए उत्साह और शक्ति का स्रोत।
पीएम ने कहा कि वंदे मातरम् गीत पर अंग्रेजों ने सख्त कानून लगाए थे। फिर भी सैकड़ों महिलाओं ने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। बारीसाल में वंदे मातरम् गाने पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए।
आज बारीसाल भारत का हिस्सा नहीं है, लेकिन उस समय वहां की महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग तक गीत के सम्मान के लिए मैदान में उतर गए थे। इसी दौरान बारीसाल की वीरांगना शांति घोष ने कहा था कि जब तक ये प्रतिबंध नहीं हटता, मैं अपनी चूड़ियां नहीं पहनूंगी। उस दौर में चूड़ियां उतारना बड़ा विरोध माना जाता था।
बंगाल की गलियों में लगातार वंदे मातरम् के लिए प्रभात फेरियां निकाला करती थीं। लोग कहते थे कि यदि वंदे मातरम् कहते-कहते जीवन भी चला जाए तो वे इसे सौभाग्य मानेंगे। धीरे-धीरे यह आवाज बंगाल से निकलकर पूरे देश की आवाज बन गई।
1905 में हरितपुर गांव में छोटे बच्चे जब वंदे मातरम् के नारे लगा रहे थे, तब अंग्रेजों ने उन पर कोड़े बरसाए। 1906 में नागपुर के नील सीटी स्कूल में भी बच्चों पर इसी तरह की मारपीट हुई। फिर भी यह नारा रुकने का नाम नहीं लेता था।
पीएम ने बताया कि 15 अक्टूबर 1936 को मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ में वंदे मातरम् के खिलाफ आवाज उठाई। उस समय कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे। जिन्ना के आरोपों का कड़ा जवाब देने के बजाय, नेहरू खुद वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि पर सवाल उठाने लगे।
नेहरू ने पांच दिन बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने जिन्ना की भावना से सहमति जताई और कहा कि आनंदमठ की पृष्ठभूमि से मुस्लिम समुदाय को चोट पहुँच सकती है। उन्होंने लिखा कि इस गीत की पृष्ठभूमि को देखकर मुस्लिम नाराज़ हो सकते हैं।
कांग्रेस ने घोषणा की कि 26 अक्टूबर को वंदे मातरम् के उपयोग पर समीक्षा की जाएगी। इसका विरोध पूरे देश में हुआ और कई जगह प्रभात फेरियां निकाली गईं। परंतु इन विरोधों के बावजूद कांग्रेस ने वंदे मातरम् को बांटकर उसका रूप बदल दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक ऊर्जा का प्रतीक है। इसमें स्वतंत्रता की भावना और आजाद भारत का विजन भी झलकता है। उन्होंने बताया कि 1857 के बाद अंग्रेज़ समझ चुके थे कि भारत पर लंबे समय तक शासन करना उनके लिए मुश्किल होगा। इसलिए उन्होंने भारत को बांटकर राज करने की नीति अपनाई और बंगाल को इसके लिए प्रयोगशाला बनाया।
प्रधानमंत्री ने एक ऐतिहासिक किस्सा साझा किया। उन्होंने कहा कि 20 मई 1906 को बारीसाल (अब बांग्लादेश में) में वंदे मातरम् जुलूस निकाला गया। इसमें लगभग 10,000 लोग सड़कों पर उतरे थे, जिनमें हिंदू और मुस्लिम सभी धर्म और जातियों के लोग शामिल थे।
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पीएम मोदी ने बताया कि रंगपुर के एक स्कूल में जब छात्रों ने वंदे मातरम् गाया, तो अंग्रेज़ों ने 200 छात्रों पर 5-5 रुपए का जुर्माना लगाया। इसके बाद कई स्कूलों में इस गीत को गाने पर पाबंदी लगा दी गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष पूरे हुए, तब भारत गुलामी में था। जब इसके 100 वर्ष पूरे हुए, तब देश आपातकाल के अंधेरे में था। आज 150 साल पूरे होने पर, भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि यह पवित्र वंदे मातरम् है जिसने स्वतंत्रता संग्राम को साहस और संकल्प का मार्ग दिखाया। आज इस सदन में इसे याद करना हम सबके लिए महान सौभाग्य और गर्व की बात है।
लोकसभा में चर्चा का मुख्य कारण वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगांठ है। लोकसभा की कार्यवाही से पहले केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि इस अवसर पर सोमवार को लोकसभा में चर्चा होगी, जबकि मंगलवार को राज्यसभा में भी यह चर्चा जारी रहेगी।
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केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने ग्रामीण इलाकों में सामाजिक न्याय को धरातल पर उतारा है।
उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण घरों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। बिजली और शौचालय जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। मुद्रा योजना के तहत लोन वितरित किए जा रहे हैं। अब तक लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
'वंदे मातरम' पर चर्चा के लिए लोकसभा में कुल 10 घंटे निर्धारित किए गए हैं, जिसमें से सत्ता पक्ष को 3 घंटे दिए गए हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गीत को लेकर विचारों में मतभेद होने के कारण चर्चा हंगामेदार भी हो सकती है।
राज्यसभा में यह सत्र मंगलवार को होगा। वहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चर्चा की शुरुआत करेंगे, इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा अपने विचार रखेंगे।