IPS राजेंद्र चतुर्वेदी का निधन!चंबल में खूंखार मलखान सिंह से लेकर फूलन देवी का सरेंडर करवाया था

आईपीएस राजेंद्र चतुर्वेदी 80 के दशक में मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित आईपीएस अधिकारी थे। मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में जब चंबल में डाकू समस्या चरम पर थी, तब भिंड एसपी के रूप में उन्होंने अह भूमिका निभाी थी।
चंबल में खूंखार मलखान सिंह से लेकर फूलन देवी का सरेंडर करवाया था
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के पूर्व अधिकारी राजेंद्र चतुर्वेदी के निधन के साथ देश ने एक बेहद साहसी और अद्वितीय सेवा भावना वाले अधिकारी को खो दिया है। चतुर्वेदी की पहचान उन अफसरों में होती थी जिन्होंने चंबल के बीहड़ों में आतंक बन चुके कुख्यात डकैतों मलखान सिंह और फूलन देवी को शांतिपूर्ण तरीके से समर्पण कराने में अहम भूमिका निभाई।

    उनकी यह उपलब्धि कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की सबसे बड़ी सफलताओं में गिनी जाती है। उनके निधन की खबर से पुलिस विभाग के साथ-साथ उन्हें करीब से जानने वाले सभी लोगों में गहरा शोक है। राजेंद्र चतुर्वेदी अपनी सख्त, निष्पक्ष और परिणाम-केंद्रित शैली के लिए जाने जाते थे, लेकिन इसके साथ ही उनकी कार्यशैली में एक गहरी मानवीय संवेदना भी थी। 

    चंबल घाटी में पोस्टिंग से चर्चा में आए

    वह मध्य प्रदेश कैडर के 1969 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। राजेंद्र चतुर्वेदी का करियर उस समय सबसे अधिक चर्चा में आया, जब उनकी तैनाती चंबल घाटी में हुई। वह इलाका जहां दशकों तक डकैतों का दबदबा था। ये गिरोह न सिर्फ आम लोगों के लिए भय का कारण थे, बल्कि कई सरकारों के लिए एक कठिन चुनौती भी बने हुए थे।

    मलखान को आत्मसमर्पण के लिए राजी करवाया

    चतुर्वेदी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था कुख्यात डाकू मलखान सिंह को आत्मसमर्पण के लिए तैयार करना। मलखान सिंह उस दौर का सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक डकैत माना जाता था, जिसके खिलाफ सैकड़ों मुकदमे दर्ज थे। चतुर्वेदी ने कठोर कार्रवाई के बजाय संवाद, भरोसा और रणनीति का ऐसा माहौल बनाया कि मलखान सिंह ने हथियार डालने का फैसला किया।

    फूलन देवी के आत्मसमर्पण के पीछे रही अहम भूमिका

    इतना ही नहीं फूलन देवी का आत्मसमर्पण उससे भी बड़ा और सनसनीखेज मामला था। 'बैंडिट क्वीन' के नाम से कुख्यात फूलन ने 1983 में मध्य प्रदेश के भिंड में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण किया था। इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन की पूरी रणनीति और समन्वय पर्दे के पीछे से IPS राजेंद्र चतुर्वेदी ही संभाल रहे थे।

    चतुर्वेदी ने लंबे समय तक संवाद और विश्वास की प्रक्रिया के जरिए फूलन देवी को यह भरोसा दिलाया कि अगर वह कानून के सामने हथियार डालती हैं, तो उन्हें न्याय मिलेगा और सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी। उनकी यह रणनीति सफल रही और फूलन देवी ने बिना किसी हिंसा के आत्मसमर्पण कर दिया।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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