आदिवासी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ : धार में कोई स्कूल शिक्षक के घर लग रहा तो कोई पेड़ के नीचे, जिम्मेदारों को नौनिहालों की फिक्र नहीं

शाहरुख बलोच, डही। ब्लॉक मुख्यालय से महज 5 से 8 किलोमीटर दूर स्थित कई शासकीय नवीन प्राथमिक विद्यालय वर्षों से अपने भवन के अभाव में संचालित हो रहे हैं। ग्राम छेंडिया (ऊपरापूरा) का विद्यालय वर्ष 2021 से, ग्राम दसाणा खरतेपुरा का विद्यालय वर्ष 2023 से तथा ग्राम नरझली मुहाल्यापुरा का विद्यालय वर्ष 2024 से शिक्षकों के निजी मकानों और पेड़ों के नीचे संचालित हो रहा है। ऐसे कई गांवों में स्कूल भवन नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी केवल 20 से 25 प्रतिशत तक सिमट गई है। वहीं जिन विद्यालयों के भवन मौजूद हैं, उनमें भी बरसात के दौरान छत टपकने और नीचे से सीपेज की समस्या बनी रहती है।

दसाणा में स्कूल पेड़ के नीचे लग रहा है
नया भवन खाली, पुराने भवन जर्जर
ग्रामीणों का कहना है कि गाजगोटा पांचबारा में नया स्कूल भवन बनने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में इस भवन का इस्तेमाल ग्रामीण पशुओं के चारे के भंडारण के लिए कर रहे हैं। ग्राम छेंडिया के निवासी रामा ने बताया कि पुराने स्कूल भवन की जर्जर छत से कवेलू गिरने के कारण एक शिक्षक घायल हो गए थे। इसके बाद भवन को असुरक्षित घोषित कर उसका उपयोग बंद कर दिया गया, लेकिन चार से पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
ये भी पढ़ें: दमोह: सागर लोकायुक्त की कार्रवाई, सहायक सचिव को 8 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा
शिक्षकों के घरों में लग रही कक्षाएं
शिक्षकों का कहना है कि वे लगातार विभाग को आवेदन देकर नए भवन की मांग कर रहे हैं। हर बार उन्हें बताया जाता है कि भवन की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन राशि के अभाव में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। मजबूरी में पिछले चार-पांच वर्षों से स्कूल शिक्षकों के घरों में संचालित हो रहे हैं। भवन नहीं होने के कारण कक्षा पहली से पांचवीं तक केवल 14 से 21 विद्यार्थी ही अध्ययनरत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उचित भवन और शैक्षणिक वातावरण के अभाव में अभिभावक भी बच्चों को विद्यालय भेजने में रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे आदिवासी क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

दसाणा का जर्जर स्कूल
दसाणा विद्यालय की छत उड़ी
शासकीय प्राथमिक विद्यालय दसाणा के शिक्षक ने बताया कि विद्यालय वर्तमान में गांव के बाकसिंह पिता दयाराम के मकान में संचालित हो रहा है। तीन वर्ष पहले आंधी-तूफान में स्कूल की छत के टीन उड़ गए थे। उस समय जिला स्तरीय टीम ने निरीक्षण कर जल्द निर्माण कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक भवन निर्माण शुरू नहीं हो सका।
ये भी पढ़ें: Ujjain Mahakal Sawari: महाकाल की नगरी में भक्ति का महासागर, 6 सवारियों के साथ लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी
अधिकारियों के दावों में विरोधाभास
विकासखंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार मारू ने बताया कि यह विषय जनशिक्षक के स्तर का है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच कराई जाएगी और दसाणा विद्यालय में जल्द टीनशेड लगवाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं डीपीसी धार कमलेश यादव ने कहा कि जर्जर भवनों को हटाने (डिस्मेंटल) की कार्रवाई शेष है। दूसरी ओर बीआरसी डही मनोज दुबे का कहना है कि भवन निर्माण के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं और स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इन बयानों के बीच विरोधाभास सामने आने से ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति है कि आखिर प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है या नहीं।

नरझली के स्कूल की स्थिति
जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
जिला पंचायत प्रतिनिधि रेवसिंह बालू चौंगड़ ने बताया कि जिला स्तरीय टीम ने सर्वे कर पंचनामा तैयार किया था। यदि भवनों की स्वीकृति मिल चुकी है तो निर्माण कार्य अब तक शुरू क्यों नहीं हुआ? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बीईओ, बीआरसी, जिला शिक्षा विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा स्कूल भवनों का निर्माण शीघ्र शुरू कराने की मांग की।
जिम्मेदारों ने यह कहा…
‘जो भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, उनमें अब केवल डिस्मेंटल की कार्रवाई शेष है। अन्य मामलों को भी मैं दिखवाता हूं।’
कमलेश यादव, डीपीसी धार
‘प्रस्ताव भेज दिए गए हैं। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।’
मनोज दुबे, बीआरसी डही












