‘भारत ने हासिल की बड़ी कूटनीतिक सफलता’, BRICS सम्मेलन पर बोले यशवंत सिन्हा

दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन का रविवार को समापन हो गया। सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया। अब पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा ने इस सम्मेलन को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की भारत यात्रा समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। यशवंत सिन्हा के मुताबिक, इस सम्मेलन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि भारत ने अलग-अलग देशों के साथ बातचीत के साथ-साथ एक संयुक्त घोषणापत्र जारी कराने में भी सफलता हासिल की।
पुतिन और शी जिनपिंग का भारत आना बड़ी सफलता
न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में यशवंत सिन्हा ने कहा कि BRICS सम्मेलन की पहली बड़ी सफलता यह रही कि जिन राष्ट्राध्यक्षों को भारत ने न्योता दिया था, वे सम्मेलन में शामिल हुए। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि बड़े देशों के नेताओं की मौजूदगी अपने आप में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके बाद सम्मेलन में हुई बातचीत और बैठकों ने भारत को अपनी कूटनीतिक भूमिका मजबूत करने का मौका दिया।
संयुक्त घोषणापत्र को बताया बड़ी उपलब्धि
यशवंत सिन्हा ने कहा कि सम्मेलन के बाद संयुक्त घोषणापत्र जारी होना भी भारत के लिए बड़ी सफलता है। उनके मुताबिक, विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति नहीं बन पाई थी, लेकिन अधिकारियों के स्तर पर लगातार कोशिश के बाद इस बार इसे जारी किया जा सका। उन्होंने कहा कि BRICS सम्मेलन में अलग-अलग देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी हुई। भारत ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दूसरे देशों के साथ सीधे संवाद किया, जिसे वह सम्मेलन की एक और बड़ी उपलब्धि मानते हैं।
चीन को लेकर सिन्हा ने दी सावधानी की सलाह
शी जिनपिंग के साथ भारत की बातचीत पर भी यशवंत सिन्हा ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि चीन के साथ बातचीत जारी रहनी चाहिए, लेकिन भारत को उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए। सिन्हा ने कहा कि चीन ने लंबे समय से भारत के लिए कई तरह की चुनौतियां खड़ी की हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत जरूरी है, लेकिन भारत को अपनी रणनीति में सावधानी बनाए रखनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक के बाद रात्रिभोज में शामिल नहीं होना भी चर्चा का विषय रहा। हालांकि, इसके पीछे की वजह को लेकर सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं।
ईरान के राष्ट्रपति की मौजूदगी भी अहम
यशवंत सिन्हा ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की भारत यात्रा को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े नेताओं के बीच पेजेश्कियान का प्रभाव सम्मेलन में देखने को मिला। उन्होंने ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान के हालात को देखते हुए उसके राष्ट्रपति का भारत आना अपने आप में महत्वपूर्ण है। सिन्हा ने कहा कि ऐसे समय में ईरान के साथ भारत के संबंध और बातचीत काफी मायने रखते हैं।
गाजा को लेकर भारत के रुख का भी किया जिक्र
इजराइल और फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी यशवंत सिन्हा ने भारत के रुख को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसा लगा था कि भारत इस मुद्दे पर अपनी पारंपरिक नीति से कुछ अलग दिखाई दे रहा है। हालांकि, उनके मुताबिक BRICS सम्मेलन में भारत फिर से अपने पुराने और पारंपरिक रुख पर लौटता हुआ नजर आया। संयुक्त घोषणापत्र में गाजा का जिक्र होना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
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'भारत ने BRICS में बड़ी सफलता हासिल की'
यशवंत सिन्हा ने कुल मिलाकर BRICS सम्मेलन को भारत के लिए सफल बताया। उन्होंने कहा कि बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी, संयुक्त घोषणापत्र और द्विपक्षीय बैठकों से भारत ने अपनी कूटनीतिक ताकत दिखाई है। उनके मुताबिक, BRICS सम्मेलन में भारत ने कई अहम मुद्दों पर अपनी भूमिका प्रभावी तरीके से निभाई और दुनिया के प्रमुख देशों के साथ संवाद को आगे बढ़ाया। हालांकि, चीन को लेकर उन्होंने साफ कहा कि बातचीत जरूरी है, लेकिन भारत को सतर्क रहते हुए आगे बढ़ना चाहिए।




















