PU Special :दूषित पानी की शिकायतें 50 हजार पार, इंदौर सबसे आगे; भोपाल दूसरे नंबर पर, साफ पानी के दावों पर उठे सवाल

अशोक गौतम, भोपाल। इंदौर के चर्चित भागीरथपुरा हादसे के बाद जागा शासन-प्रशासन दूषित पानी की आपूर्ति रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में पूरे साल मिलाकर पानी से जुड़ी जितनी शिकायतें आई थीं, उतनी शिकायतें इस साल शुरुआती आठ महीनों में ही दर्ज की जा चुकी हैं। दूषित पेयजल की शिकायतों के मामले में इंदौर नगर निगम पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है, जबकि राजधानी भोपाल दूसरे स्थान पर बना हुआ है। प्रमुख शहरों में गंदे पानी की शिकायतों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि लगभग हर बड़े शहर में पिछले साल की तुलना में इस बार दूषित पानी की समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं।
भागीरथपुरा घटना के बाद भी स्थिति चिंताजनक
भागीरथपुरा घटना के बाद सरकार ने सभी नगरीय निकायों को पेयजल स्रोतों की सघन जांच और दूषित स्रोतों को बंद करने के सख्त निर्देश जारी किए थे। इस अभियान के तहत प्रदेशभर में सैकड़ों नलकूपों (बोरवेल) और जलस्रोतों को अनुपयोगी घोषित कर सील भी किया गया। लेकिन इसके बावजूद भी जनता को पीने के साफ पानी के लिए तरसना पड़ रहा है, जो नगर निगमों की निगरानी, जर्जर पाइपलाइन व्यवस्था और जल परीक्षण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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आठ महीनों में 50 हजार से ज्यादा शिकायतें
पिछले महज आठ महीनों में ही दूषित और गंदे पानी की शिकायतों का आंकड़ा सीएम हेल्पलाइन पर 50 हजार के पार पहुंच चुका है। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में पूरे साल मिलाकर पानी से जुड़ी जितनी शिकायतें आई थीं, उतनी शिकायतें इस साल शुरुआती आठ महीनों में ही दर्ज की जा चुकी हैं। दूषित पेयजल की शिकायतों के मामले में इंदौर नगर निगम पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है।
इंदौर में सबसे ज्यादा, भोपाल दूसरे नंबर पर
प्रमुख शहरों में गंदे पानी की शिकायतों के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2026 में अब तक आठ माह में इंदौर में 15,298 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि वर्ष 2025 में पूरे साल 11,940 शिकायतें आई थीं। भोपाल में इस साल अब तक 8,826 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 6,085 था। ग्वालियर में 6,685 शिकायतें आई हैं, जबकि पिछले साल 8,586 शिकायतें दर्ज हुई थीं।
जबलपुर और सतना में भी बढ़ी समस्या
जबलपुर में वर्ष 2026 के शुरुआती आठ महीनों में 4,08 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि वर्ष 2025 में पूरे साल 5,595 शिकायतें आई थीं। सतना में इस साल अब तक 3,235 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जबकि वर्ष 2025 में पूरे साल 2,928 शिकायतें दर्ज हुई थीं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि लगभग हर बड़े शहर में पिछले साल की तुलना में इस बार दूषित पानी की समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं।
नमूने लिए, लेकिन समाधान शून्य
भोपाल के कोलार क्षेत्र निवासी शिवा काशी का कहना है कि उन्होंने पानी में मटमैलापन और बदबू आने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई थी। नगर निगम के कर्मचारी घर आकर पानी का सैंपल तो ले गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना तर्क है कि, बारिश के मौसम में मटमैला पानी आना स्वाभाविक है।
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अमृत प्रोजेक्ट से राहत मिलने का दावा
प्रशासन और विभाग का दावा है कि अमृत प्रोजेक्ट से राहत मिलेगी। मध्य प्रदेश में अमृत योजना के 293 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जो अगले दो सालों में पूरे हो जाएंगे। इससे जल आपूर्ति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। विभाग का लक्ष्य है कि आगामी पांच वर्षों में 80 प्रतिशत आबादी को सीधी पाइपलाइन के जरिए शुद्ध जल उपलब्ध कराया जाए। जर्जर पाइपलाइनों के रखरखाव और मरम्मत का काम लगातार जारी है और शिकायतों का जल्द निराकरण कराया जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे के अनुसार, दीर्घकालिक योजना के तहत जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। हालांकि, मौजूदा शिकायतों का बढ़ता आंकड़ा साफ पानी की आपूर्ति और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।




















