कभी आंगन का हिस्सा था आंकड़े का पेड़, इसी की जड़ के नीचे खुदाई में मिली पंचमुखी गणेश प्रतिमा..! आज इसी स्थान पर बना गणेश धाम

इंदौर। स्नेहलतागंज की पुरानी गलियों में स्थित पंचमुखी श्री अर्केश्वर गणेश धाम की कहानी काफी अलग है। यह स्थान कभी जोशी परिवार के घर का आंगन हुआ करता था। आंगन में आंकड़े का करीब 27 फीट ऊंचा पेड़ था, जिसकी परिवार के लोग नियमित पूजा करते थे। नवंबर 2002 में परिवार की एक महिला को सपना आया कि पेड़ की जड़ के नीचे गणेश स्वरूप मौजूद है। इसके बाद जड़ के आसपास खुदाई कराई गई। मिट्टी हटाने पर पंचमुखी गणेश प्रतिमा का स्वरूप सामने आया। परिवार ने इसे आस्था का संकेत माना और प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने का फैसला किया।
प्रतिमा को नहीं हटाया, वहीं बना मंदिर
गणेश स्वरूप मिलने के बाद परिवार ने प्रतिमा को किसी दूसरी जगह ले जाने के बजाय उसी स्थान को धार्मिक स्थल बनाने का निर्णय लिया। समय के साथ यहां मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। वर्ष 2004 में प्रतिमा की स्थापना के बाद यह स्थान पंचमुखी श्री अर्केश्वर गणेश धाम के नाम से जाना जाने लगा। आज मंदिर में रोज श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।
पंचमुखी रूप बनी मंदिर की खास पहचान
मंदिर में विराजित गणेश प्रतिमा का पंचमुखी स्वरूप श्रद्धालुओं का खास ध्यान खींचता है। प्रतिमा की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है। इसकी बनावट भी इसे दूसरी गणेश प्रतिमाओं से अलग बनाती है। मंदिर के पुजारी संदीप तिवारी के अनुसार, सामान्य दिनों में भी यहां सैकड़ों लोग दर्शन के लिए आते हैं। बुधवार और चतुर्थी पर भीड़ और बढ़ जाती है।
गणेश उत्सव में बढ़ जाती है रौनक
गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में विशेष सजावट और पूजा होती है। महाआरती, भजन-कीर्तन, धार्मिक प्रवचन, महाप्रसादी और सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इस दौरान मंदिर में सुबह से देर शाम तक भक्तों की आवाजाही बनी रहती है।
पांच मुखों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं
श्रद्धालु पंचमुखी गणेश स्वरूप को ज्ञान, समृद्धि, सुरक्षा, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति से जोड़कर देखते हैं। इसी वजह से इस मंदिर में विशेष रूप से पंचमुखी गणेश के दर्शन करने की मान्यता है। परिवार के लिए भी इस स्थान से जुड़ी यादें आज तक खास हैं।
पेड़ की याद आज भी परिवार के साथ
रजत जोशी बताते हैं कि करीब 18 वर्ष पहले घर के छोटे से बगीचे में सफेद आंकड़े का पौधा अपने आप उग आया था। धार्मिक आस्था के कारण परिवार ने उसे सहेजा और पूजा शुरू की। परिवार की मान्यता है कि गणेश स्वरूप मिलने के बाद घर में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ी। उनका कहना है कि कारोबार में भी इसके बाद अच्छा बदलाव देखने को मिला।




















