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उज्जैन/वाराणसी/हरिद्वार। सावन का आज दूसरा सोमवार है और देशभर में शिवभक्ति का माहौल चरम पर है। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर, उत्तरप्रदेश के काशी विश्वनाथ धाम और उत्तराखंड के हरिद्वार में शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना और विशेष आरती का आयोजन किया गया, वहीं कांवड़ यात्रा का भी उल्लास पूरे देश में देखने को मिल रहा है। हरिद्वार से अब तक 3 करोड़ से अधिक कांवड़िए गंगाजल लेकर रवाना हो चुके हैं।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के पट आज सुबह 2:30 बजे खोल दिए गए। भोर में की गई भस्म आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। इससे पहले भगवान वीरभद्र का पूजन किया गया और गर्भगृह में स्थित सभी देव प्रतिमाओं की पूजा की गई।
आरती से पहले पंचामृत- दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया। ‘हरि ओम’ का जल अर्पित कर मंदिर में घंटाल बजाया गया और फिर भांग का लेप, सूर्य चिन्ह, रजत कुंडल, नवीन मुकुट और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई।
पूजन के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म अर्पित की गई। यह दृश्य इतना अलौकिक था कि हजारों श्रद्धालु इसके साक्षी बनने मंदिर परिसर में उमड़ पड़े।
आज शाम बाबा महाकाल की दूसरी शाही सवारी नगर भ्रमण पर निकलेगी। भगवान चंद्रमौलेश्वर पालकी में और भगवान मनमहेश हाथी पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर सभामंडप में पूजन के बाद परंपरागत मार्ग से सवारी रवाना होगी। इस बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर सवारी में सांस्कृतिक रंग भी नजर आएंगे।
इस बार की शाही सवारी में देश की विभिन्न जनजातियों के 8 सांस्कृतिक दल भी शामिल किए गए हैं। ये दल परंपरागत वेशभूषा में नृत्य-प्रस्तुति देंगे, जिससे शोभायात्रा और भी भव्य और अलौकिक बन जाएगी। शामिल प्रस्तुतियाँ:
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में आज तड़के 3 बजे कपाट खोले गए, और 4 बजे मंगला आरती हुई। आरती के दौरान बाबा को स्वर्ण मुकुट और राम नाम की माला पहनाई गई। मंदिर परिसर में 5 किलोमीटर लंबी कतारें श्रद्धालुओं की उमड़ी रहीं। भक्तों पर फूलों की वर्षा की गई, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
उत्तराखंड के हरिद्वार में इस बार कांवड़ियों की संख्या 3 करोड़ पार कर चुकी है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से कांवड़िए गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने यातायात, सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।