Shivani Gupta
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Aakash Waghmare
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71 साल की उम्र में भी जैकी चैन दुनिया को चौंकाना जानते हैं। इस बार वजह कोई स्टंट या फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसा गीत है, जिसे वे अपनी मौत के बाद रिलीज करना चाहते हैं। मंच पर जब उन्होंने इसे ‘एक अंतिम संदेश’ बताया, तो उनकी आवाज भर्रा गई। उस पल लगा जैसे एक लीजेंड अपनी ज़िंदगी की पूरी कहानी कुछ सुरों में समेट देना चाहता हो, लेकिन जैकी चैन की यह कहानी सिर्फ गीत तक सीमित नहीं है—यह दर्द, संघर्ष, चोटों और ज़िद से लिखी गई एक पूरी फिल्म है।
1954 में हॉन्गकॉन्ग में जन्मे जैकी का बचपन आसान नहीं था। महज 7 साल की उम्र में, 1961 में उन्हें चीनी ओपेरा रिसर्च इंस्टीट्यूट भेज दिया गया। यहां रोज़ाना 20 घंटे की कठोर ट्रेनिंग, सख्त अनुशासन और शारीरिक सजा आम बात थी। अपनी आत्मकथा ‘माय लाइफ इन एक्शन’ (1998) में उन्होंने लिखा- “वहां आंसू भी अनुमति लेकर गिरते थे।” यही ट्रेनिंग आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
70 और 80 के दशक में जब ज्यादातर अभिनेता स्टंट डबल्स का सहारा लेते थे, जैकी चैन अपने सभी स्टंट खुद करते थे। इस जुनून की कीमत भी चुकानी पड़ी। उन्हें 30 से ज्यादा गंभीर चोटें लगीं, कई बार मौत बेहद करीब से भी गुजरी। 1986 में फिल्म ‘आर्मर ऑफ गॉड’ की शूटिंग के दौरान सिर में लगी गंभीर चोट ने उन्हें लगभग मौत के मुंह में धकेल दिया। बाद में उन्होंने कहा—“उस दिन लगा कि मुझे दूसरा मौका मिला है… और उसे बर्बाद नहीं करना।”
सफलता जैकी चैन के लिए सीधी नहीं आई। 1980 से 1990 के बीच लगभग एक दशक तक हॉलीवुड ने उन्हें नकारा।
कहा गया- “तुम अलग दिखते हो, अलग बोलते हो।” लेकिन 1998 में आई ‘रश ऑवर’ ने सब बदल दिया। जैकी चैन रातों-रात ग्लोबल स्टार बन गए और एक्शन-कॉमेडी की नई भाषा दुनिया को मिली।
2003 में उनकी जिंदगी ने एक और चौंकाने वाला मोड़ लिया। उनके पिता चार्ल्स चैन ने बताया कि वे सीआईए से जुड़े एजेंट थे और उनकी मां कभी अफीम तस्करी के मामले में गिरफ्तार हो चुकी थीं। अपनी दूसरी आत्मकथा ‘नेवर ग्रो अप’ (2015) में जैकी लिखते हैं-‘मेरी जिंदगी के सबसे बड़े राज मेरे सबसे करीबी लोग थे।’ वह निजी जिंदगी को लेकर भी खुद को बेदाग नहीं बताते। स्वीकारते हैं—‘मैं अपने बेटे जेसी के लिए अच्छा पिता नहीं बन पाया। दुनिया को हंसाता रहा, अपना घर रुलाता रहा।’
आज उनका “मौत के बाद रिलीज होने वाला गीत” चर्चा में है, लेकिन जैकी चैन खुद इसे विदाई नहीं मानते। वे कहते हैं—‘आखिरी होने का डर मत रखो… अधूरा रह जाने का डर रखो।’ शायद यही जैकी चैन की पूरी जिंदगी का सार है। डर से नहीं, जिद से लिखी गई एक बेमिसाल कहानी।