Tiger Shroff Firing Case: लॉरेंस बिश्नोई गैंग का बड़ा खुलासा, ऑटो चालकों और दुकानदारों के खातों से शूटरों तक पहुंचाए पैसे

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में अब लॉरेंस बिश्नोई गैंग के एक ऐसे फाइनेंशियल नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके जरिए आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल शूटरों तक पैसे पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि इस नेटवर्क में ऑटो-रिक्शा चालकों और छोटे दुकानदारों को महज 10 रुपए जैसे मामूली कमीशन का लालच दिया जाता था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, विदेश में बैठा गैंग का सदस्य अनिल पंडित इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। उसके छोटे भाई अभिषेक पंडित और अभिषेक की पत्नी सुनेहा पंडित की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा
टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच अब सिर्फ शूटरों और साजिशकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गैंग के आर्थिक नेटवर्क की भी गहराई से जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने पैसों के लेन-देन के लिए एक अलग तरीका अपनाया था। आमतौर पर आपराधिक गतिविधियों में पैसों का लेन-देन जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बनता है। इसी से बचने के लिए गैंग ने आम नागरिकों के बैंक खातों और यूपीआई क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया। इससे विदेश में बैठे गैंग के सदस्यों और मुंबई में मौजूद शूटरों के बीच सीधे पैसों का लेन-देन नहीं होता था। क्राइम ब्रांच के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए शूटरों की रोजमर्रा की जरूरतों और अन्य खर्चों के लिए रकम पहुंचाई जा रही थी।
विदेश में बैठा अनिल पंडित दे रहा था शूटरों को निर्देश
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अनिल पंडित विदेश में बैठकर मुंबई में मौजूद शूटरों फूल सिंह, रेहान और ऋतिक के संपर्क में था। वह उन्हें लगातार निर्देश दे रहा था और पैसों की व्यवस्था करने में भी अहम भूमिका निभा रहा था। बताया जा रहा है कि अनिल पंडित ने अपने भाई अभिषेक पंडित के साथ मिलकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया था, जिसमें छोटे दुकानदारों और ऑटो चालकों के बैंक खातों को माध्यम बनाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में पहले शूटर स्थानीय लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद उनसे उनका यूपीआई क्यूआर कोड लिया जाता था। इन क्यूआर कोड की तस्वीरें अनिल पंडित को भेजी जाती थीं। अनिल यह जानकारी अपने भाई अभिषेक तक पहुंचाता था।
ऑटो किराए के बहाने हासिल करते थे यूपीआई क्यूआर कोड
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में पैसों के लेन-देन का एक दिलचस्प तरीका सामने आया है। शूटरों ने ऑटो-रिक्शा चालकों से यूपीआई क्यूआर कोड हासिल करने के लिए किराए का बहाना बनाया था। दरअसल, टाइगर श्रॉफ के घर की रेकी और अन्य गतिविधियों के दौरान शूटरों ने मुंबई में आने-जाने के लिए ऑटो-रिक्शा का इस्तेमाल किया था। जब किराया देने की बारी आती थी, तो वे चालकों से कहते थे कि उनका कोई दोस्त या रिश्तेदार ऑनलाइन पैसे भेज देगा। इस बहाने ऑटो चालक अपना यूपीआई क्यूआर कोड दे देते थे। इसके बाद उनके खाते में ऑनलाइन रकम पहुंचाई जाती थी। शूटर किराए की रकम अपने पास रख लेते थे और बाकी पैसे ऑटो चालकों से नकद ले लेते थे।
1,510 रुपए के ट्रांजैक्शन से खुला नेटवर्क का राज
इस पूरे मामले में एक दुकानदार के यूपीआई क्यूआर कोड से हुआ ट्रांजैक्शन जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बना है। क्राइम ब्रांच को जांच के दौरान पता चला कि एक दुकानदार के खाते में 1,510 रुपए ट्रांसफर किए गए थे। इसके बदले दुकानदार को केवल 10 रुपए कमीशन दिया गया, जबकि बाकी 1,500 रुपए शूटरों ने नकद हासिल कर लिए। यानी महज 10 रुपए के लालच में दुकानदार का बैंक खाता गैंग के आर्थिक लेन-देन का माध्यम बन गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसी तरह ढाबों, होटलों और छोटी दुकानों पर भी इस तरीके का इस्तेमाल किया जाता था। जहां शूटर खाना खाते या ठहरते थे, वहां भी ऑनलाइन पेमेंट के नाम पर क्यूआर कोड हासिल करने की कोशिश की जाती थी।
अभिषेक पंडित और सुनेहा पंडित की भूमिका भी जांच के घेरे में
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में अनिल पंडित के छोटे भाई अभिषेक पंडित की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है। मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक, अभिषेक इस मामले में वांटेड है। जांच में सामने आया है कि अभिषेक ने साल 2022 में सुनेहा पंडित से शादी की थी। आरोप है कि सुनेहा हरियाणा के करनाल से अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने का काम कर रही थी। वहीं, जांच एजेंसियों को शक है कि अभिषेक फिलहाल विदेश में छिपा हुआ है। उसके क्रिप्टो वॉलेट और हवाला नेटवर्क के जरिए गैंग के आर्थिक लेन-देन को संभालने की आशंका भी जताई जा रही है।
डिजिटल फोरेंसिक से जोड़ रही है क्राइम ब्रांच पैसों की कड़ियां
मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस पूरे फाइनेंशियल नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। जांच एजेंसियां डिजिटल फोरेंसिक और तकनीकी निगरानी के जरिए पैसों के लेन-देन से जुड़े सुराग जुटा रही हैं। जांच के दौरान एजेंसियां मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाश रही हैं- सुनेहा पंडित ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल कितनी रकम ट्रांसफर की? मुंबई में मौजूद शूटरों तक कितने रुपए पहुंचाए गए? इस नेटवर्क में कितने ऑटो चालक और दुकानदार शामिल हुए? अनिल और अभिषेक पंडित के बीच पैसों के लेन-देन का पूरा तरीका क्या था?
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में आगे क्या होगा?
टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में अब जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। शुरुआत में जहां पुलिस का फोकस फायरिंग करने वाले शूटरों और उनकी गिरफ्तारी पर था, वहीं अब गैंग की फंडिंग, विदेशी कनेक्शन और पैसों के नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।



















