MP में PG मेडिकल काउंसलिंग पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इन-सर्विस कोटे में 30% से ज्यादा सीटें नहीं

मध्य प्रदेश में MD-MS की PG मेडिकल काउंसलिंग को लेकर हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने 2 नवंबर को दिए गए आदेश को न तो बदला और न ही रद्द किया। इसके चलते इन-सर्विस कैटेगरी का कोटा 30% तक सीमित रखने का आदेश प्रभावी रहेगा। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को दोपहर 2:30 बजे होगी।
90% सीटें इन-सर्विस कोटे में देने का आरोप
यह मामला भोपाल के डॉक्टर सरबजीत सिंह और डॉ. जान्हवी बत्रा की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (DME) की ओर से तैयार मेरिट लिस्ट को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि MD-MS के PG कोर्स में ओपन और इन-सर्विस कैटेगरी की मेरिट लिस्ट को आपस में मिला दिया गया है। इसके चलते करीब 90% सीटें इन-सर्विस कोटे के तहत आवंटित की जा रही हैं। उनका कहना है कि PG मेडिकल एडमिशन में योग्यता और मेरिट को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मौजूदा व्यवस्था के कारण ज्यादा अंक हासिल करने वाले ओपन कैटेगरी के कई छात्रों को उनकी मेरिट और पसंद के मुताबिक सीटें नहीं मिल पा रही हैं।
हाईकोर्ट ने 30% कोटे की सीमा बरकरार रखी
इस मामले में 2 नवंबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए कहा था कि इन-सर्विस कैटेगरी की सीटें 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए। गुरुवार को राज्य सरकार और अन्य पक्षों की ओर से इस आदेश में संशोधन की मांग की गई थी। हालांकि, डिवीजन बेंच ने इसे बदलने या रद्द करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद फिलहाल 30% कोटे की सीमा वाला पुराना आदेश लागू रहेगा।
3 नवंबर से रुकी है PG मेडिकल काउंसलिंग
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि 2 नवंबर के अंतरिम आदेश के बाद डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन ने 3 नवंबर को पूरी काउंसलिंग रोक दी थी। गुरुवार को आदेश में बदलाव की मांग पर विचार के बाद भी कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को दोपहर 2:30 बजे होगी। ऐसे में PG मेडिकल एडमिशन और काउंसलिंग को लेकर आगे की स्थिति पर सबकी नजर रहेगी।




















