अशोक गौतम, भोपाल। नर्मदा नदी में शाहगंज सहित पांच स्थानों पर लगाए गए वॉटर क्वालिटी संयंत्र के बेहतर परिणाम आने के बाद सरकार ने वॉटर बॉडीज की नियमित मॉनिटरिंग का निर्णय लिया है। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नदी और तालाबों की मॉनिटरिंग करेगा।
फिलहाल भोपाल की बड़ी झील और शाहपुरा लेक के अलावा इंदौर के यशवंत सागर, मंदाकिनी, बेतवा, चंबल, कान्ह, शिप्रा में ये संयंत्र लगाए जाएंगे। ऑनलाइन मॉनिटरिंग के दौरान पानी की गुणवत्ता अगर एकदम से बदल जाती है, तो मौके पर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) के अधिकारी पहुंचकर उसकी जांच करेंगे। जांच में नाला या उद्योगों का गंदा पानी मिलते पाए जाने पर संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी।
नदियों को निर्मल बनाने का प्रयास चल रहा है। इस संबंध में नगरीय निकायों, पंचायतों को सीवेज के पानी को नदी में छोड़ने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। उद्योगों को भी गंदा पानी नदियों में बहाने पर प्रतिबंधित किया गया है। इसकी मॉनिटरिंग NGT सीधे तौर पर कर रही है। सरकार की योजना 2028 तक नदियों को निर्मल करने की है। वॉटर क्वालिटी संयंत्र लगने से NGT और आम जनता एयर क्वालिटी की तर्ज पर पानी की गुणवत्ता का भी आकलन कर सकेगी। इससे अधिकारी रिपोर्ट में हेराफेरी कर NGT अथवा सरकार को गुमराह नहीं कर पाएंगे।
नर्मदा नदी में जल गुणवत्ता मापक संयंत्र अमरकंटक, डिंडोरी, होशंगाबाद, ओंकारेश्वर सहित पांच जगहों पर लगाए गए हैं। नए साल में 5 और स्थानों-बरमान घाट, नेमावर, हनुवंतिया, महेश्वर और राजघाट में भी ये संयत्र लगाए जाएंगे। नर्मदा नदी में 51 स्थानों पर संयंत्र लगाने की योजना है। नर्मदा के पानी की गुणवत्ता जांच के लिए 51 स्थानों से सैंपल लिए जाते हैं।