गुना। आजादी के 75 वर्षों बाद भी यदि किसी महिला को अपने नवजात शिशु के साथ बैलगाड़ी में अस्पताल ले जाया जाए, तो यह न केवल व्यवस्थाओं की विफलता है बल्कि एक गंभीर सवाल भी उठाता है।
मध्य प्रदेश के गुना जिले की बमोरी विधानसभा के डामरा डेरा गांव से आई एक तस्वीर ने शासन-प्रशासन की विकास संबंधी दावों की पोल खोलकर रख दी है। गांव में सड़कों की बदहाल स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच न होना, एक बार फिर से आमजन के सामने आ चुका है।
डामरा डेरा गांव में बीते दिन एक महिला की घरेलू प्रसव के बाद स्थिति बिगड़ने पर परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया। लेकिन बारिश और कीचड़ भरे कच्चे रास्तों की वजह से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। मजबूरन, ग्रामीणों ने महिला और नवजात को बैलगाड़ी में बैठाकर कई किलोमीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाया।
इस दर्दनाक सफर का वीडियो वायरल हो चुका है, जिसने सोशल मीडिया पर आमजन और जागरूक नागरिकों के बीच रोष और चिंता दोनों को जन्म दे दिया है।
गांव में 30 से 40 घर हैं और हर साल मानसून के दौरान यह इलाका दलदली मैदान में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में पैदल निकलना भी मुश्किल होता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। कई बार मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं क्योंकि समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
डामरा डेरा गांव बमोरी विधानसभा में आता है, जहां से निर्वाचित विधायक दो बार मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वहीं, यहां के सांसद केंद्र सरकार में मंत्री पद पर भी आसीन हैं। बावजूद इसके, इस गांव में पक्की सड़क तक नहीं बनी है। यह विडंबना उस समय और भी त्रासद बन जाती है जब यह समझ आता है कि प्रशासनिक और राजनीतिक पहुंच के बावजूद इस छोटे से गांव को बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हुईं।
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा है। अब उम्मीद की जा रही है कि यह वीडियो प्रशासन को नींद से जगाएगा और जल्द ही डामरा डेरा के लोगों को सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाएं मिलने लगेंगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है कि गांव तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। एंबुलेंस और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं बिना बाधा गांव तक पहुंच सकें। मानसून में कीचड़ और दलदल से निपटने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए।
(इनपुट – राजकुमार रजक)