सुप्रीम कोर्ट :वकील बोले मस्जिदें सबके लिए, लेकिन नियम अलग; हिजाब आस्था का हिस्सा, हर रिवाज कुरान में दर्ज नहीं
असम के कामाख्या मंदिर की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि हर धार्मिक प्रथा को भेदभाव नहीं कहा जा सकता। उन्होंने बताया कि इस मंदिर में देवी की पूजा योनि रूप में होती है और मासिक धर्म को उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
Aakash Waghmare
28 Apr 2026


























