
विजय एस. गौर, भोपाल। लव जिहाद हो या कच्ची उम्र के इश्क में घर से गायब हो जाने वाली लड़कियों को ढूंढ निकालने में पुलिस शत-प्रतिशत कामयाब हो रही है। आलम यह है कि आसपास के जिलों से लेकर दूसरे राज्यों के दूरस्थ अंचलों तक से बालिकाओं को ढूंढ कर परिजनों के हवाले पुलिस कर रही है। इसी क्रम में सूबे में गुम बालिकाओं की बरामदगी में आगर मालवा जिला अव्वल साबित हुआ है। जहां की पुलिस ने मोबाइल या दूसरी कोई भी लिंक नही होने के बाद भी बेसिक पुलिसिंग से नाबालिग लड़की को चंद महीनों में ही गुजरात के बड़ोदरा के पास से ढूंढ निकाला।
दरअसल प्रदेश में गायब होने वाली लड़कियों का पता लगाने के लिए जनवरी 2021 से ऑपरेशन मुस्कान की शुरुआत हुई है। इसके तहत प्रत्येक थाने में महिला पुलिस और सायबर की विशेष टीमें बनाई गई हैं, जोकि आसपास के थानों से लेकर दूसरे जिलों तक से संपर्क में रहती हैं। नतीजे में गुमशुदा लड़कियों की जानकारी प्रदेश के प्रत्येक थाने में पहुंच जाती है। इससे जहां गुम लड़कियों का पता लगाने में आसानी होती है, वहीं नाबालिग लड़कियों के मामले में आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई भी हो पाती है।
गुम लड़कियों के मामले में जहां बेसिक पुलिसिंग को फॉलो किया जा रहा है, वहीं आधुनिक संसाधनों का भी इस्तेमाल होता है। इससे मोबाइल कॉल डिटेल के साथ ही जहां से लड़की गायब होती है, वहां के आसपास के मोबाइल क्रास चेक होते हैं। सार्वजनिक परिवहन को भी खंगाला जाता है। एटीएम से निकासी से लेकर लड़की या संदिग्ध के घर आने-जाने वालों पर भी निगाह रखी जाती है।

गुमशुदगी दर्ज होते ही जिले का संबंधित थाना तत्काल महिला सेल और सायबर सेल को सूचना देता है, जिसके बाद लड़की के परिवार, दोस्तों से लेकर मोहल्ले तक के मोबाइल, सीसीटीवी, ट्रांसपोर्ट चेक करते हैं। यह नहीं होने पर बेसिक पुलिसिंग से पता करते हैं।
विनोद सिंह चौहान, एसपी, आगर मालवा
सालों से गायब नाबालिग बालिकाओं की सकुशल बरामदगी के लिए अभियान चला रहे है। इसमें 25 आदिवासी बालिकाएं दस्तयाब हो चुकी हैं, जोकि करीब ढ़ाई साल से गुम थी। कोशिश है कि इस साल के अंत तक सभी गायब हुई बालिकाओं की वापसी हो सके।
आदित्य मिश्रा, एसपी, बालाघाट
गुम लड़कियों को ढूंढने के लिए प्रत्येक थाने से लेकर जिलेस्तर की समीक्षा प्रति माह होती है। इसमें रिकवरी देखने के बाद संबंधित जिलों को निर्देशित किया जाता है। इसके परिणाम बेहतर मिल रहे हैं, यहां तक कि 6 से 7 साल पूर्व गुम हुई या बहला-फुसलाकर ले जाई गई लड़कियों तक की दस्तयाबी हो पा रही है। इस बारे में बेहद सक्रियता से सतत पुलिस टीमें लगी रहती हैं।
अनिल कुमार, एडीजी, वीमन सिक्योरिटी, पीएचक्यू, भोपाल