
अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में भूमि रिकॉर्ड का लेखा जोखा ऑनलाइन होने से लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी। सरकार का दावा है कि जल्द ही यह काम 100 प्रतिशत हो जाएगा। इसके बाद नागरिकों को अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी रियल टाइम ऑनलाइन उपलब्ध होगी। राजस्व रिकॉर्ड के साथ-साथ प्रदेश की अंतर्राज्यीय सीमाओं का भी डिजिटलीकरण कर लिया गया है। प्रदेश की सीमाएं उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र से सटी हैं। इन सभी सीमाओं का डिजिटल मैप तैयार होने से सीमा विवादों के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है। अभी तक कई मामलों में सीमांकन को लेकर विवाद लंबित रहते थे, जिन्हें अब तकनीकी आधार पर आसानी से सुलझाया जा सकेगा।
यह पूरा काम केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत किया जा रहा है। वर्ष 2017 में शुरू की गई इस योजना की समय सीमा पहले वर्ष 2020 तक थी, जिसे बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दिया गया। कुल मिलाकर, प्रदेश में भूमि प्रबंधन का डिजिटल बदलाव आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित होने वाला है, जहां जमीन से जुड़ी हर जानकारी अब एक क्लिक पर उपलब्ध होगी।
सरकार अब भूमि अभिलेखों को आधार नंबर से जोड़ने और राजस्व न्यायालयों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से लिंक करने की दिशा में काम कर रही है। इससे भूमि विवादों के निपटारे में तेजी और पारदर्शिता दोनों आएगी।
प्रदेश में खसरा-खतौनी जैसे रिकॉर्ड पहले से ऑनलाइन मिल रहे हैं, लेकिन अब सभी सेवाओं को एकीकृत डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों और जमीन मालिकों को दस्तावेजों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
करण सिंह वर्मा, राजस्व मंत्री, मप्र