
संतोष चौधरी, भोपाल। मध्यप्रदेश में लगभग 47 साल बाद जंगली भैंसों (Wild Buffaloes) की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से पहले चरण में 5 जंगली भैंसे 30 अप्रैल तक करीब 2,000 किलोमीटर का सफर तय कर प्रदेश पहुंचेंगे। इन्हें कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपनार क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।
शुरुआत में यानी मार्च माह में 15 भैंसों को लाने की योजना बनाई गई थी। खराब मौसम के कारण सिर्फ 3 भैंसे (दो नर और एक मादा) ही पकड़े जा सके और ऑपरेशन रोकना पड़ा था। मौसम सुधरने के बाद भैंसों को पकड़ने का ट्रांसलोकेशन ऑपरेशन अप्रैल में फिर शुरू किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान 2 और भैंसे ही पकड़े जा सके। काजीरंगा प्रबंधन ने अब पांच भैंसे ही मप्र भेजने का निर्णय लिया है। सूत्रों ने बताया कि बाकी 10 भैंसों को अगले चरण में भेजा जाएगा।
इसलिए खास है मिशन : 1979 के बाद प्रदेश में नहीं दिखे जंगली भैंसे, विलुप्त प्रजाति की पुनर्स्थापना का प्रयास, कान्हा में जैव विविधता बढ़ेगी।
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यह पहल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से संभव हुई है। जनवरी 2026 में मध्यप्रदेश और असम सरकार के बीच हुए समझौते के तहत कुल 50 जंगली भैंसों को चरणबद्ध तरीके से कान्हा लाने की योजना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, काजीरंगा में एशियाई जंगली भैंसों की सबसे बड़ी आबादी है, इसलिए इसे इस प्रजाति के पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त स्रोत माना गया। वर्तमान में काजीरंगा में लगभग 1,660 जंगली भैंसे मौजूद हैं।
प्रदेश में यह प्रजाति 1979 के बाद से विलुप्त मानी जाती रही है। ऐसे में यह मिशन न सिर्फ जैव विविधता के संरक्षण, बल्कि वन्यजीव इतिहास में एक अहम कदम माना जा रहा है। 47 साल पहले तक कान्हा में इनकी मौजूदगी पाई जाती थी।
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पहले चरण में जंगली भैंसों को लाने हमारे विशेषज्ञों की टीम काजीरंगा पहुंच चुकी है। इन्हें लाने की तैयारी अंतिम दौर में है। कुछ दिनों में जंगली भैंसे मप्र पहुंच जाएंगे। इन्हें कान्हा टाइगर रिजर्व में बसाया जाएगा। शुभरंजन सेन, पीसीसीएफ (हॉफ)