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ATF की कीमतें बढ़ीं :एयरलाइंस ने सरकार से कहा- फ्यूल की कीमतों में तुरंत दखल दें

ऑपरेशंस जारी रखना हो रहा काफी कठिन, एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी से इसपर खर्च 55 से 60 फीसदी तक पहुंचा
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एयरलाइंस ने सरकार से कहा- फ्यूल की कीमतों में तुरंत दखल दें

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका और ईरान युद्ध के चलते देश की एयरलाइन इंडस्ट्री दबाव में है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें बढ़ने के कारण हालात ऐसे बन गए हैं कि इंडस्ट्री अपना कामकाज रोकने या बंद करने की कगार पर आ गई है।

एअर इंडिया, IndiGo और SpiceJet जैसी एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने यह चेतावनी जारी की है। FIA ने सरकार को एक SOS भेजा है, जिसमें उसने कहा है कि देश में ATF की कीमतों के मामले में सरकार तुरंत दखल दे।

चुनाव के चलते सरकार ने 25 % तय की कीमत

बता दें कि कई राज्यों में विधानसभा चुनावों के कारण सरकार ने अप्रैल महीने के लिए घरेलू उड़ानों के ATF की बेस कीमत में बढ़ोतरी की सीमा 25 प्रतिशत तय कर दी थी। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए इसमें 100 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी की गई थी। अब अप्रैल के आखिर में मई महीने के लिए कीमतों में बदलाव होने वाला है। 

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इस बदलाव से पहले एयरलाइंस ने ATF की कीमतों को तर्कसंगत बनाने की मांग की है। इसमें घरेलू उड़ानों के लिए ATF पर लगने वाली एक्साइज़ ड्यूटी 11 प्रतिशत को कुछ समय के लिए हटाने की मांग है। इसके साथ ही कुछ राज्यों में VAT में कमी करने की मांग की है। 

तमिलनाडु और दिल्ली में सबसे ज्यादा वैट

भारत के सबसे बड़े एविएशन हब  दिल्ली में VAT की दर 25 प्रतिशत है जो कि देश में दूसरी सबसे ज्यादा है। तमिलनाडु में यह 29 प्रतिशत है। मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता मैं वैट 16 से 20 प्रतिशत तक लगता है।
इन 6 स्थानों से देश की 50 फीसदी उड़ानों संचालित होती हैं।

FIA ने ATF की वर्तमान एड-हॉक प्राइसिंग में सरकार से दखल की मांग की है। इससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय ऑपरेशन्स में भारी असंतुलन पैदा हो रहा है और एयरलाइन नेटवर्क अव्यावहारिक और अस्थिर होते जा रहे है।

FIA ने एविएशन सेक्रेटरी समीर सिन्हा को भेजे एक पत्र में कहा है कि इस सेक्टर की गंभीर हालत को पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और ATF की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने बदतर बना दिया है। पहले ATF पर खर्च एयरलाइंस के कुल खर्च का 30-40 प्रतिशत हिस्सा होता था। लेकिन अप्रैल में हुई बढ़ोतरी के बाद यह हिस्सा बढ़कर 55-60 प्रतिशत तक हो गया है। रुपए की कीमत में आई भारी गिरावट ने भुगतान संबंधी मुश्किलों को और भी बढ़ा दिया है।

कई देशों के एयरस्पेस बंद होने से भी दिक्कत

वेस्ट एशिया में जंग के चलते एयरस्पेस बंद होने की वजह से भी ऑपरेशंस की लागत बढ़ी है। इसको देखते हुए काम जारी रखने के लिए, और मौजूदा हालात से निपटने के लिए एयरलाइंस ने तुरंत सरकार के दखल की मांग की है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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