अपनों के साथ मनाई जाती है, फिर भी नाम ‘गेर’भागीरथपुरा वाली घटना की छाया भी दिखाई दी
'गेर', अपनों के साथ रंगों और उल्लास का त्योहार, अपनी विशिष्ट परंपराओं के बावजूद कुछ अनछुए पहलुओं को समेटे हुए है। यह लेख गेर के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है, और इसके आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है।
Hemant Nagle
9 Mar 2026



























