मप्र की सड़कों पर रफ्तार का कहर:एक साल में 1 लाख से ज्यादा लोग हादसों का शिकार, सागर में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं

हर्षित चौरसिया, जबलपुर। मध्यप्रदेश में सड़क हादसों के आंकड़े लगातार डराने वाले होते जा रहे हैं। तेज रफ्तार और लापरवाही अब प्रदेश के युवाओं की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। 108 एम्बुलेंस सेवा द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मई 2025 से अप्रैल 2026 के बीच प्रदेशभर में सड़क दुर्घटनाओं के 1 लाख 3 हजार 294 मामले दर्ज किए गए जिनमें घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। रिपोर्ट में सामने आया है कि सड़क हादसों का सबसे ज्यादा शिकार 16 से 30 साल के युवा हो रहे हैं।
61% हादसों में युवा बने शिकार
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल सड़क दुर्घटनाओं में 61 प्रतिशत पीड़ित 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवा रहे। इसके बाद 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी लोग 24 प्रतिशत हादसों का शिकार बने। वहीं 46 से 60 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत रही। 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संख्या 4 प्रतिशत और 61 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत दर्ज की गई है।
सागर जिले में सबसे ज्यादा सड़क हादसे
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में सागर जिला सबसे ऊपर रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक सागर में सबसे ज्यादा 6,061 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इसके बाद इंदौर में 4,853, भोपाल में 4,546, छिंदवाड़ा में 3,406, जबलपुर में 3,398, धार में 3,363, रीवा में 3,289, सतना में 2,912, विदिशा में 2,786 और खरगोन में 2,748 सड़क दुर्घटनाएं सामने आईं।
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सागर में ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर रहा प्रशासन
सागर संभाग के कमिश्नर अनिल सुचारी ने कहा कि प्रशासन सड़क हादसों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया कि जिले और संभाग में दुर्घटनाओं को कम करने के लिए ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जा रहे हैं और उनमें सुधार कार्य जारी है। उनका कहना है कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य गोल्डन ऑवर के भीतर पीड़ितों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके।
सागर में हादसे ज्यादा होने की ये है बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि सागर की भौगोलिक स्थिति सड़क हादसों के बढ़ते आंकड़ों की बड़ी वजह है। सागर जिला प्रदेश के करीब 10 जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण जंक्शन माना जाता है। यहां लंबी दूरी के वाहनों और भारी ट्रैफिक का दबाव लगातार बना रहता है। हाईवे पर तेज रफ्तार और वाहनों की अधिक आवाजाही के कारण दुर्घटनाओं की संख्या अन्य जिलों की तुलना में ज्यादा दर्ज की जा रही है।
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हर कॉल किसी की जिंदगी बचाने का मौका
108 एम्बुलेंस सेवा के एसएम एवं पीआरओ तरुण सिंह परिहार ने कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवा का हर कॉल किसी की जिंदगी बचाने का अवसर होता है। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में उनकी टीम ने प्रदेशभर में 1,03,294 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाई जिससे हजारों लोगों की जान बचाई जा सकी।












