इंदौर -- 77 वर्ष पुरानी गेर की परंपरा एक बार फिर रंगपंचमी के अवसर पर रविवार को पूरे उल्लास के साथ जीवंत हो उठी। रंगों की इस अनोखी परंपरा में जब गुलाल और रंगों की बारिश हुई तो लाखों हुरियारे भी उसके रंग में सराबोर हो गए। यह ऐसी गेर थी जिसमें कोई पराया नहीं था। हर कोई अपनेपन के रंग में रंगा नजर आया। पूरे शहर ने रंगों के इस अद्भुत उत्सव का आनंद लिया।भागीरथपुरा की घटना की छाया इस बार इंदौर की रंगपंचमी की गेर पर भी साफ दिखाई दी। हर वर्ष जिस गेर में जनप्रतिनिधियों की बड़ी मौजूदगी रहती थी,वहां इस बार राजनीतिक चेहरों की कमी खलती नजर आई। न तो महापौर दिखाई दिए और न ही महापौर परिषद के सदस्य। नगर निगम की गेर परंपरा के अनुसार जरूर निकली, लेकिन इसकी जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों की बजाय अधिकारियों ने संभाली।
संगम कार्नर से निकलने वाली गेर में आमतौर पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला और क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि रंगों के इस जुलूस में शामिल होते थे, लेकिन इस बार वे भी नजर नहीं आए। इसी तरह विधानसभा क्षेत्र चार से निकलने वाली हिंद रक्षक राधा-कृष्ण फाग यात्रा में हर साल विधायक मालिनी गौड़ की मौजूदगी रहती थी, मगर इस बार उन्होंने भी दूरी बनाए रखी। दरअसल, भागीरथपुरा कांड के बाद जनप्रतिनिधियों ने रंगपंचमी के आयोजनों से खुद को अलग रखने का फैसला किया था। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी कुछ दिन पहले ही साफ कर दिया था कि परंपरा के मुताबिक निगम की गेर तो निकलेगी, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से इसमें शामिल नहीं होंगे। उनके इस फैसले के बाद महापौर परिषद के कई सदस्यों ने भी गेर से दूरी बना ली।
रंगपंचमी से एक दिन पहले मल्हारगंज चौराहे पर होने वाला बजरबट्टू सम्मेलन भी इस बार नहीं हो सका। इस आयोजन में वर्षों से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी रहती थी, लेकिन उनके शामिल न होने की सूचना के बाद आयोजकों ने कार्यक्रम को ही निरस्त कर दिया। तभी यह साफ हो गया था कि इस बार गेर में उनका आना संभव नहीं होगा।