MP News :मप्र राज्यसभा में एंट्री पाने के लिए प्रवासी भाजपा नेताओं का अनुकूल ठिकाना

मध्यप्रदेश के कोटे से एक दर्जन बाहरी नेता संसद जाते रहे हैं। यहां से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करने वालों की लंबी फेहरिस्त है। हालांकि यहां से सांसद रहने और केंद्रीय मंत्री पद संभालने के बाद वे मप्र को 'शुकराने' के नाम पर कोई सौगात नहीं दे सके।
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मप्र राज्यसभा में एंट्री पाने के लिए प्रवासी भाजपा नेताओं का अनुकूल ठिकाना

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश कोटे की राज्यसभा सीटों पर दशकों से अन्य राज्यों के कद्दावर नेताओं की नजरें रहीं है। राज्य विभाजन के बाद ही दूसरे राज्यों के 13 नेता मप्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उच्च सदन में मप्र का प्रतिनिधित्व करते हुए कई प्रवासी नेता केंद्रीय मंत्री भी रहे। लेकिन राज्य के खाते में 'शुकराने' के नाम पर उनकी कोई उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं है। दूसरे राज्यों के कोटे से राज्यसभा जाने वालों में मप्र के महज 2-3 नेता ही हैं।

11 सीटों पर दूसरे राज्यों के नेता बने सांसद

18 जून को होने वाले चुनाव में पंजाब के भाजपा नेता तरुण चुग का यहां से निर्विरोध राज्यसभा सदस्य बनना तय हो चुका है। जबकि केंद्रीय मंत्री एवं तमिलनाडु के निवासी डॉ. एल.मुरुगन की दूसरी पारी चल रही है।  केरल निवासी एवं केंद्रीय मंत्री जार्ज कुरियन का कार्यकाल हाल ही में पूरा हुआ। मप्र-छग विभाजन के बाद यहां की 11 सीटों पर कोई न कोई प्रवासी प्रत्याशी आता रहा।  कांग्रेस की तुलना में भाजपा नेताओं की संख्या ज्यादा रही।  मप्र के कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी (छतरपुर) व समाजवादी मुनव्वर सलीम ऐसे नेता रहे हैं जिन्हें उनकी पार्टी ने दूसरे राज्यों के कोटे से उच्च सदन की सदस्यता दिलाई।

सत्यव्रत-मुनव्वर और जया बच्चन

राहुल एवं सोनिया गांधी के करीबी रहे चतुर्वेदी को कांग्रेस ने 2006 में उत्तराखंड से राज्यसभा में भेजा। जबकि समाजवादी पार्टी ने विदिशा जिले के मुनव्वर सलीम (अब दिवंगत) को उत्तरप्रदेश से उच्च सदन की सदस्यता दिलाई। सलीम, सपा नेता आजम खान के काफी निकटस्थ थे। इसके अलावा भोपाल में जन्मी अभिनेत्री जया बच्चन भी उप्र से अभी राज्यसभा सदस्य हैं। उन्हें भी सपा ने उच्च सदन में भेजा है।

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राज्य को बड़ी सौगात नहीं दी

तमिलनाडु, केरल, ओडिशा, बंगाल, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों के कई नेता राज्यसभा में मप्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इनमें से कई नेता केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी रहे लेकिन उनके नाम पर कोई उपलब्धि नजर नहीं है। हालांकि भोपाल में एम्स शुरू कराने में सुषमा स्वराज की विशेष भूमिका रही।

मप्र है आसान ठिकाना 

दिल्ली की सत्ता और राष्ट्रीय राजनीति प्रभावी नेताओं के लिए मप्र आसान और मुफीद ठिकाना रहता है। यहां के नेता और लोग भी सभी को स्वीकारने वाले हैं। हिंदी बेल्ट होने के कारण यहां की सियासी घटनाएं राजस्थान, उप्र, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात और अन्य पड़ोसी राज्यों को भी प्रभावित करती हैं।

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ये दिग्गज रह चुके मप्र के कोटे से राज्यसभा सदस्य 

  • जार्ज कुरियन (केरल)
  • धर्मेंद्र प्रधान (वर्तमान में केंद्रीय मंत्री)
  • लाल कृष्ण आडवाणी पूर्व डिप्टी पीएम (गुजरात)
  • सुषमा स्वराज (अब दिवंगत) (हरियाणा-दिल्ली)
  • प्रकाश जावड़ेकर (महाराष्ट्र)
  • नजमा हेपतुल्ला (महाराष्ट्र)
  • एमजे अकबर (पश्चिम बंगाल)
  • चंदन मित्रा (पश्चिम बंगाल)
  • एल. गणेशन (तमिलनाडु)
  • सु.थिरुनावुक्करासर

भाजपा ने इन सभी को उच्च सदन में भेजा। अविभाजित मप्र के दौरान कांग्रेस ने भी दूसरे राज्यों के कई नेताओं को यहां से उच्च सदन भेजा।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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