मध्यप्रदेश में पुराने ब्रिजों की मरम्मत अटकी:जर्जर पुलों पर मंडरा रहा खतरा, बारिश में रोज गुजरेंगे 50 हजार वाहन; PWD को नहीं मिल रहे ठेकेदार

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून से पहले सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के कई पुराने और जर्जर पुलों की मरम्मत और मजबूतीकरण का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। वजह यह है कि विभाग को इन पुलों के सुधार कार्य के लिए ठेकेदार ही नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में रोजाना करीब 50 हजार वाहन इन्हीं खतरनाक पुलों से गुजरने को मजबूर होंगे।
15 साल से ज्यादा पुराने 200 पुलों का हुआ सर्वे
पीडब्ल्यूडी ने करीब दस महीने पहले प्रदेशभर के 15 वर्ष से अधिक पुराने करीब 200 पुलों का सर्वे कराया था। इनमें से लगभग 50 पुल 20 से 60 साल पुराने पाए गए। ये पुल प्रदेश के प्रमुख मार्गों पर स्थित हैं और कई जिलों की यातायात व्यवस्था की अहम कड़ी बने हुए हैं। रिपोर्ट में सामने आया कि कई पुलों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है और तत्काल मरम्मत या मजबूतीकरण की जरूरत है।
ठेकेदार नहीं मिलने से अटका काम
इन पुलों के रखरखाव और मजबूतीकरण के लिए विभाग ने चार अलग-अलग समूह बनाकर टेंडर जारी किए थे। हालांकि ठेकेदारों ने इस काम में खास रुचि नहीं दिखाई। कुछ एजेंसियां सामने आईं लेकिन वे तकनीकी शर्तों और पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं कर सकीं। इसके चलते पूरी प्रक्रिया अटक गई है। अब विभाग दोबारा टेंडर जारी करने की तैयारी कर रहा है लेकिन मानसून शुरू होने से पहले काम पूरा होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
बारिश में और बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश और भारी वाहनों के दबाव से पुराने पुलों की स्थिति और खराब हो सकती है। समय रहते मरम्मत और मजबूतीकरण नहीं होने पर हादसों का खतरा बढ़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की 31 जुलाई 2025 को हुई बैठक में भी प्रदेश के 50 पुलों की खराब स्थिति की रिपोर्ट सामने आई थी। कमेटी ने तत्काल सुधार कार्य कराने के निर्देश दिए थे। इनमें रतलाम-नसीराबाद रोड पर शिवना नदी का पुल और रतलाम-बांसवाड़ा मार्ग पर माही नदी का पुल प्रमुख हैं। ये पुल क्रमशः वर्ष 1972 और 1966 में बनाए गए थे। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक पुल वर्ष 2020 से पहले के बताए गए हैं।
रीवा में टूटी मुंडेर और निकले तार
रीवा जिले के सहिला ब्रिज की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है। स्थानीय निवासी प्रकाश तिवारी के मुताबिक पुल की मुंडेर टूटी हुई है और कई जगहों पर लोहे के तार बाहर निकल आए हैं। पुल और सड़क के बीच कई गड्ढे भी हो गए हैं जिससे बारिश में वाहन चालकों की जान जोखिम में रहती है।
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जर्जर पुलों की मरम्मत संभव नहीं
लोक निर्माण विभाग (सेतु) के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता बीपी पटेल ने कहा कि किसी पुल की औसत आयु 50 से 60 साल मानी जाती है। यदि पुल पूरी तरह जर्जर हो चुका है तो उसकी सिर्फ मरम्मत नहीं की जा सकती, बल्कि उसे नए सिरे से बनाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि लोहे, सरिया और कंक्रीट में पानी पहुंच चुका है तो संरचना को बदलना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
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बारिश से पहले काम मुश्किल
पीडब्ल्यूडी ब्रिज विंग के मुख्य अभियंता पीसी वर्मा ने स्वीकार किया कि बारिश से पहले पुलों का रिपेयर और मजबूतीकरण कार्य पूरा होना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि पहले जारी टेंडरों में ठेकेदारों ने रुचि नहीं दिखाई, इसलिए अब दोबारा टेंडर जारी किए जाएंगे।












