
इंदौर। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के खिलाफ सैकड़ों अभ्यर्थियों ने बुधवार को इंदौर में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन विभिन्न मांगों को लेकर किया गया, जिसमें आयोग की भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग प्रमुख रही। नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के बैनर तले छात्रों ने ‘MPPSC न्याय यात्रा’ निकाली, जो DD पार्क से शुरू होकर लोक सेवा आयोग कार्यालय तक पहुंची।
इन मांगों को लेकर प्रदर्शन
अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में बैनर और नारे के साथ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि MPPSC की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
- छात्रों ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा में यूपीएससी की तरह एक भी सवाल गलत नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग शुरू की जानी चाहिए ताकि मेरिट के आधार पर चयन हो।
- छात्रों ने मांग की कि सीजीपीएससी की तर्ज पर एमपीपीएससी की मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं जांची जाएं।
- छात्रों का सुझाव है कि इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों के नाम, श्रेणी और सरनेम को छिपाकर वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए ताकि चयन में निष्पक्षता बनी रहे।
- छात्रों ने मांग की कि 2019 की मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं सार्वजनिक की जाएं और मार्कशीट जारी की जाए।
- राज्य सेवा के लिए 700 पदों और वन सेवा के लिए 100 पदों के साथ 2025 का नोटिफिकेशन जारी किया जाए।
- छात्रों ने 2023 की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा का परिणाम जल्द से जल्द जारी करने की मांग की।
- 87/13 फॉर्मूला समाप्त कर सभी परिणाम 100% पर जारी किए जाएं ताकि किसी भी तरह की अनियमितता से बचा जा सके।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने बताया कि एमपीपीएसी की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को नुकसान होता है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
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