Aakash Waghmare
12 Jan 2026
हैदराबाद। तेलंगाना के हनमकोंडा जिले से सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने पशु अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बड़ी संख्या में आवारा कुत्तों की मौत के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू करते हुए कई लोगों को आरोपी बनाया है। यह मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है।
स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अदुलापुरम गौतम और फरजाना बेगम ने 9 जनवरी को श्यामपेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में 6 जनवरी से तीन दिनों के भीतर करीब 300 आवारा कुत्तों को जहर देकर मार दिया गया। बताया गया कि इन कुत्तों की मौत के बाद उनके शवों को गांवों के बाहरी इलाकों में फेंक दिया गया।
इस पूरे मामले में गांवों के सरपंचों और ग्राम पंचायत सचिवों की भूमिका रही है। आरोप है कि उन्होंने दो लोगों को पैसे देकर आवारा कुत्तों को जहर देने और बाद में उनके शवों को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर श्यामपेट थाने में नौ आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 325 और प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट 1960 की धारा 11(1) के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि फोन रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयानों से संकेत मिले हैं कि कुछ आरोपियों ने पुलिस में मामला दर्ज होने से पहले निजी बातचीत में आवारा कुत्तों की हत्या की बात स्वीकार की थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर स्थानीय पुलिस को सही ढंग से केस दर्ज करने के निर्देश दिए साथ ही पशुओं के अवशेषों का पोस्टमार्टम कर फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर जोर दिया, ताकि जांच मजबूत हो सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर नजर आ रहा है और सभी आरोपों की गहराई से जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।