MP स्टार्टअप समिट DAY-2 :ड्रोन आधारित फॉर्मिंग, AI क्लासेस से लेकर धूम्रपान छोड़ने में उपयोगी MOUTH-फ्रेशनर की रही चर्चा

MP स्टार्टअप समिट के दूसरे दिन यानी सोमवार को कई युवाओं ने अपनी कंपनियों के बारे में जरूरी जानकारी दी। इनमें ड्रोन बेस्ड एग्रीकल्चर फॉर्मिंग से जुड़े प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी साझा की गई
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ड्रोन आधारित फॉर्मिंग, AI क्लासेस से लेकर धूम्रपान छोड़ने में उपयोगी MOUTH-फ्रेशनर की रही चर्चा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। सुरक्षित नौकरी और तय वेतन तक सीमित रहने वाले सपनों से आगे बढ़कर मध्य प्रदेश के कुछ युवाओं ने जोखिम का रास्ता चुना है। राजधानी के रवींद्र भवन में शुरू हुई दो दिवसीय मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट–2026 में पहुंचे ऐसे युवाओं की कहानियां यह साबित करती हैं कि अगर हौसला बड़ा हो, तो अस्थिरता भी अवसर में बदल सकती है।

    प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए इन युवाओं ने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर अपने विचारों और नवाचार पर भरोसा किया। आज ये युवा न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बन चुके हैं, बल्कि दूसरों के लिए रोजगार के नए अवसर और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान भी तैयार कर रहे हैं। जो राज्य के अनेक युवाओं के लिए इंस्पिरेशन बने हैं।

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    दूसरे दिन क्या कुछ रहा खास

    MP स्टार्टअप समिट के दूसरे दिन यानी सोमवार को कई युवाओं ने अपनी कंपनियों के बारे में जरूरी जानकारी दी। इनमें ड्रोन बेस्ड एग्रीकल्चर फॉर्मिंग से जुड़े प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी साझा की गई, इसके अलावा कॉमन स्कूल स्टार्टअप से जुड़े संस्थापक कृष्णकांत चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि कॉमन स्कूल के बारे में बताते हुए एक AI बेस्ड कम्युनिटी प्लेटफॉर्म है। इसके अलावा भी कई कंपनी फाउंडर्स ने दूसरे दिन अपने प्रोजेक्ट की खासियत बताई है।

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    आयुष्मान पाटीदार

    समिट में इंदौर के जीएसआईटीएस कॉलेज से आए आयुष्मान पाटीदार ने अपने प्रोजेक्ट के बारे में हमें जानकारी दी । उनका प्रोजेक्ट ड्रोन बेस्ड फॉर्मिंग का है। इस प्रोजेक्ट में ड्रोन की मदद से फर्टिलाइजर किया जाता है। वहीं तस्वीरें के जरिए पौधे के अंदर, पेड़ों के अंदर होने वाली बिमारी, कितना उत्पादन हुआ उसका पता लगाया जा सकता है। आगे वे कहते हैं कि बिमारी को चिन्हित कर उसकी के अनुसार साल भर में कुल उत्पादन का पता लगाया जा सकता है। 

    कृष्णकांत चतुर्वेदी

    कृष्णकांत चतुर्वेदी कॉमन स्कूल के नाम से अपना स्टार्टअप चलाते हैं। कृष्णकांत बताते हैं कि कॉमन स्कूल AI बेस्ड कोचिंग प्लेटफॉर्म है जहां 18 साल से लेकर 35 साल के लोगों के लिए कम्युनिकेशेन स्किल्स की ट्रेनिंग के लिए पॉथ-वे बनाते हैं। जहां लोग AI अवतारों से घुलते-मिलते हैं। इस दौरान वर्बल-नॉन वर्बल डेटा को फेच कर सेल्फ कोचिंग रिपोर्ट तैयार की जाती हैं। 

    आकाश पारीक

    आकाश पारीक डॉयलॉग-आईटीएस में मैनेजर के पद पर कार्यरत है। इनकी कंपनी ड्रोन की सेवाएं देती है जो साल 2023 में शुरू की गई थी। कंपनी अलग-अलग ड्रोन्स ऑपरेट करती है। जिसमें सर्विलांस ड्रोन, खेतीबाड़ी के ड्रोन, लैंड मेपिंग सर्वे के ड्रोन भी शामिल है। आकाश बताते हैं कि उनकी कंपनी ने ड्रोन सेवाओं को अब तक MP पुलिस, MP फॉरेस्ट को सप्लाई की है। फिलहाल कंपनी के पास 7 से 8 रेडी अप्रुव्ड मॉडल है जो आरएनडी अप्रुव्ड मॉडल है।

    अभिषेक मेहरा

    अभिषेक मेहरा की कंपनी माउथ फ्रेशनर के उत्पादों की ब्रिक्री करती है। कंपनी लॉन्ग-फ्रेश के नाम से संचालित है। अभिषेक कहते हैं कि कंपनी फ्लो-बेस्ड माउथ-फ्रेशनर बेच रही है, बता दें यह भारत का पहला फ्लो बेस्ड माउथ फ्रेशनर है। इसकी खास चीजों के बारे में बात की जाए तो अभिषेक ने कहा कि कंपनी न सिर्फ ताजगी देती है, बल्कि इसके अलावा भी कई सारे स्वास्थ्य लाभ भी देती है। 

    इनमें पाचन से जुड़ी समस्या, इसके अलावा पान-मसाला और तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों के लिए भी यह फ्रेशनर उनकी लगातार नशे कीबढ़ती भूख को कंट्रोल करने में काफी उपयोगी है। इसके बनाने के तरीके पर अभिषेक कहते हैं कि कंपनी पहले इसे रोस्ट करती है ताकि इसकेतत्व बढ़े जिससे अधिक फायदा पहुंचे। साथ ही में इसमें फ्लेवर कोटिंग करके तैयार किया जाता है। ताकि सभी लोग इसे आसानी से खा सके।

    वैभव नागोरी

    वैभव नागोरी एमपी समिट में ग्रोबोट्स एसे डिजिटल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वैभव की कंपनी का खास फोकस NEP यानी कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर है। वे बताते हैं कि NEP को ध्यान में रखते हुए उन्होंने रोबोटिक्स किड्स तैयार किए हैं। यह कक्षा चौथी से लेकर दसवीं के बच्चों के लिए खास बनाई गई है। 

    रोबोटिक्स किड्स की जानकारी साझा करते हुए वैभव ने बताया इसमें यह फायदा मिलता है कि भारत के हर बच्चों को कोडिंग सीखना आना चाहिए। इसे मध्य प्रदेश के हिसाब से खास तैयार किया गया है चूंकि एमपी एक हिंदी भाषी राज्य है। तो यहां हिंदी कोडिंग भविष्य के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। उनकी इच्छा है कि प्रदेश के सबी सरकारी स्कूलों में इसे लागू किया जाना चाहिए। वहीं एमपी के अलावा कंपनी ने मराठी में भी कोडिंग प्लेटफॉर्म बनाई है जो नागपुर के 50 सरकारी स्कूलों में मराठी कोडिंग के साथ में बच्चों को रोबोटिक्स कोडिंग की शिक्षा दी जा रही है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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