Vijay S. Gaur
12 Jan 2026
भोपाल। चिकित्सीय क्षेत्र में जल्द ही देश नई छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। AIIMS भोपाल, IIT इंदौर के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित 3डी पोर्टेबल एक्स-रे यूनिट तैयार कर रहे हैं। यह यूनिट एडवांस कम्प्यूटेशनल इमेज प्रोसेसिंग और एआई एल्गोरिदम पर आधारित होगी, जिससे बेहद कम रेडिएशन डोज में भी सीटी स्कैन के बराबर हाई डेफिनेशन 3D इमेज प्राप्त होगी। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह दुनिया की पहली ऐसी पोर्टेबल यूनिट होगी, जिसमें रेडिएशन स्तर पारंपरिक सीटी स्कैन की तुलना में लगभग 500 गुना कम रहेगा।
ICMR ने AIIMS के इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। मालूम हो कि इस साल साल ICMR को देशभर से 1,224 शोध प्रस्ताव मिले थे। इसमें से 338 प्रपोजल एक्सेप्ट किए गए हैं। इसमें से मप्र में से सिर्फ एक प्रोजेक्ट को चुना गया है।
यूनिट की खास बात यह है कि एआई की मदद से मल्टी-एंगल एक्स-रे डेटा को 3D इमेज में बदला जाएगा। मशीन एक्स-रे का उपयोग कर AI सॉफ्टवेयर इमेज की क्वालिटी को बेहतर करेगी, जिससे हड्डियों और आंतरिक संरचनाओं की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।डायग्नोसिस की सटीकता पर भी फोकस होगा।
AIIMS के मैक्सोफेशियल सर्जन डॉ. बीएल सोनी और डॉ. अंशुल राय प्रमुख शोधकर्ता के रूप में काम करेंगे। यूनिट को पूरी तरह पोर्टेबल स्वरूप में तैयार किया जा रहा है, जिससे इसे एंबुलेंस, आपदा स्थल, सड़क हादसों और ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा। अस्पताल से बाहर ही ऑन द स्पॉट एक्स-रे और 3D इमेजिंग संभव होने से इमरजेंसी ट्रीटमेंट में लगने वाला कीमती समय बचेगा।
AIIMS भोपाल मैकेनिज्म को तैयार करेगा, वहीं, IIT इंदौर AI सॉफ्टवेयर तैयार करेगा। पूरा प्रोजेक्ट तीन चरण में पूरा होगा। पहले चरण में शरीर के एक अंग के लिए यूनिट तैयार होगी। फिर, होल बॉडी इमेज यूनिट तैयार की जाएगी। अंत में कैंसर मरीजों के रेडिएशन के लिए इसी मशीन का उपयोग किया जा सकेगा।
डॉ.बीएल सोनी, मैक्सोफेशियल सर्जन, AIIMS