जब मुझे कोई नहीं जानता... Teachers Day पर सचिन तेंदुलकर हुए भावुक, पिता को याद कर शुरू की खास फेलोशिप

क्रिकेट के मैदान पर अपनी बल्लेबाजी से करोड़ों लोगों का दिल जीतने वाले सचिन तेंदुलकर के लिए 5 सितंबर का दिन बेहद भावुक रहा। शिक्षक दिवस के मौके पर सचिन ने अपने पिता रमेश तेंदुलकर को याद किया और बताया कि उनके क्रिकेट करियर की असली शुरुआत मैदान से नहीं, बल्कि घर से हुई थी। सचिन ने अपने पिता को अपना पहला मेंटर, गाइड और सबसे बड़ा भरोसा देने वाला व्यक्ति बताया।
पिता ने सबसे पहले पहचाना क्रिकेट का प्यार
सचिन ने बताया कि जब दुनिया उन्हें नहीं जानती थी, तब उनके पिता ने उनके अंदर क्रिकेट के प्रति जुनून को पहचाना। उन्हें यह नहीं पता था कि बेटा आगे चलकर कितना बड़ा नाम कमाएगा, लेकिन उन्होंने सचिन को क्रिकेट में अपना रास्ता तलाशने की पूरी आजादी दी। रमेश तेंदुलकर खुद लेखक, कवि और प्रोफेसर थे। सचिन के मुताबिक, पिता ने उन्हें सिर्फ क्रिकेट खेलने की आजादी नहीं दी, बल्कि जीवन में सही और गलत के बीच फर्क समझना भी सिखाया।
'जीत से ज्यादा जरूरी है आपका चरित्र'
सचिन ने अपने पिता से मिली उन सीखों को भी याद किया, जो आज तक उनके साथ हैं। उन्होंने बताया कि पिता हमेशा ईमानदारी से आगे बढ़ने और किसी भी तरह के शॉर्टकट से बचने की बात करते थे। उनकी सीख का मतलब साफ था कि कामयाबी हासिल करना जरूरी है, लेकिन अपने सिद्धांतों से समझौता करके नहीं। सचिन के लिए पिता की यही बातें उनके क्रिकेट करियर और निजी जीवन का मजबूत आधार बनीं।
हर टैलेंट को चाहिए सही गुरु
सचिन ने कहा कि भारत में प्रतिभाशाली बच्चों की कोई कमी नहीं है। कोई खेल में अच्छा है तो कोई पढ़ाई या किसी दूसरे क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकता है। समस्या कई बार प्रतिभा की नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और अवसर की होती है। कई बच्चों को अच्छे कोच, मेंटर, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं या सीखने का बेहतर माहौल नहीं मिल पाता। ऐसे में एक शिक्षक या मेंटर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वह उस क्षमता को पहचान सकता है जिसे बच्चा खुद भी शायद नहीं देख पाता।
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पिता के नाम पर शुरू की मेमोरियल फेलोशिप
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सचिन तेंदुलकर ने शिक्षक दिवस पर एक खास ऐलान किया। वह अपने लंबे समय से जुड़े हेल्थकेयर पार्टनर इंगा हेल्थ फाउंडेशन के साथ मिलकर 'प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर मेमोरियल फेलोशिप' शुरू कर रहे हैं। इस फेलोशिप के तहत हर साल एक MD डॉक्टर को श्रीनगर में क्लेफ्ट और क्रेनियोफेशियल केयर में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए एक साल की आर्थिक मदद दी जाएगी। प्रोग्राम पूरा करने वाले फेलो को उनके बेहतर प्रदर्शन के लिए सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की ओर से प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
शिक्षा की सीख को आगे बढ़ाने की कोशिश
सचिन के लिए यह फेलोशिप सिर्फ उनके पिता की याद में शुरू किया गया कार्यक्रम नहीं है। यह उनके पिता की उस सोच को आगे ले जाने की कोशिश है, जिसमें शिक्षा को बेहतर अवसरों का रास्ता माना गया। सचिन ने कहा कि उनके पिता ने पूरी जिंदगी शिक्षा और मार्गदर्शन को महत्व दिया। उन्होंने सचिन को खुद अपनी मंजिल चुनने का भरोसा दिया और अब सचिन भी चाहते हैं कि दूसरे बच्चों और युवाओं को अपनी क्षमता पहचानने और उसे निखारने का मौका मिले। शिक्षक दिवस पर सचिन का यह संदेश एक बार फिर बताता है कि एक अच्छे शिक्षक की सीख सिर्फ एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहती। उसका असर कई जिंदगियों और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकता है।




















