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झीरम घाटी केस: 13 साल बाद बड़ा फैसला, NIA कोर्ट से 10 आरोपी दोषी करार

13 साल का इंतजार खत्म,झीरम घाटी हत्याकांड में 10 आरोपी दोषी, अब सजा पर सबकी नजर,झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल बाद बड़ा फैसला आया है। जगदलपुर स्थित NIA कोर्ट ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस केस में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी, लेकिन एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
झीरम घाटी केस: 13 साल बाद बड़ा फैसला, NIA कोर्ट से 10 आरोपी दोषी करार

प्रेम कुमार, रायपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और दर्दनाक नक्सली हमलों में शामिल झीरम घाटी हत्याकांड में 13 साल बाद बड़ा फैसला आया है। जगदलपुर स्थित NIA कोर्ट ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। 25 मई 2013 को हुए इस हमले में कांग्रेस की तत्कालीन प्रदेश स्तरीय नेतृत्व टीम समेत 32 लोगों की जान चली गई थी। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी। अब 10 आरोपियों पर कोर्ट का फैसला आया है।

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13 साल बाद आया फैसला, 10 आरोपी दोषी

झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 5 सितंबर को जगदलपुर की NIA कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। इस केस की सुनवाई लंबे समय से चल रही थी। अभियोजन पक्ष ने आरोपों को साबित करने के लिए कोर्ट में 101 गवाहों के बयान और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए थे।

10 अगस्त को पूरी हुई थी अंतिम बहस

मामले में 10 अगस्त को अंतिम बहस पूरी हो गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध होने का दावा किया, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती दी थी।

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फैसले से संतुष्ट नहीं बचाव पक्ष, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

दोषी करार दिए गए 10 आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने कोर्ट के फैसले पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसके खिलाफ हाईकोर्ट का रुख करेंगे। अब पूरे मामले में अगली नजर दोषियों को दी जाने वाली सजा पर रहेगी।

झीरम केस की जांच पर भूपेश बघेल ने उठाए थे सवाल

झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले भी सवाल उठा चुके हैं। उनका आरोप था कि NIA की जांच में कथित षड्यंत्र के पीछे मौजूद लोगों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।बघेल ने दावा किया था कि दरभा थाने में दर्ज FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और कोर्ट के निर्देश के बावजूद गुडसा उसेंडी का बयान नहीं लिया गया।

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बघेल बोले जांच सही नहीं हुई तो फैसला उपलब्ध साक्ष्यों पर ही होगा

बघेल का कहना था कि झीरम घाटी हत्याकांड के पीछे के कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचना जरूरी था। उन्होंने कहा था कि यदि जांच ही सही तरीके से नहीं हुई, तो अदालत के सामने उपलब्ध जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही फैसला आएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री के साथ मध्य क्षेत्र की बैठक में झीरम मामले की जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग की थी।

SIT को लेकर भी हुआ था विवाद

झीरम घाटी मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने SIT का गठन किया था। बघेल के मुताबिक, NIA ने SIT की जांच को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां से फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया। हालांकि, तब तक राज्य में उनकी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो चुका था।

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आखिर 25 मई 2013 को झीरम घाटी में क्या हुआ था?

साल 2013 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव होने वाले थे। उस समय राज्य में रमन सिंह के नेतृत्व में BJP सरकार थी और कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटी थी। इसी दौरान कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में परिवर्तन यात्रा शुरू की थी। 25 मई 2013 को सुकमा में परिवर्तन यात्रा की रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर की ओर रवाना हुआ था।

करीब 25 गाड़ियों में सवार थे नेता और कार्यकर्ता

कांग्रेस नेताओं का काफिला करीब 25 गाड़ियों का था। इसमें लगभग 200 नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। काफिले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, कवासी लखमा, महेंद्र कर्मा और कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। काफिले में बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार समेत पार्टी की कई प्रमुख हस्तियां भी थीं।

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दोपहर 3:40 बजे पहुंचा काफिला, फिर शुरू हुआ खूनी हमला

दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी पहुंचा। इसी दौरान नक्सलियों ने पेड़ गिराकर सड़क को अवरुद्ध कर दिया। काफिला रुकते ही बड़ी संख्या में हथियारबंद नक्सलियों ने हमला कर दिया। बताया गया कि 200 से ज्यादा नक्सलियों ने काफिले को घेरकर फायरिंग शुरू कर दी थी। करीब डेढ़ घंटे तक गोलीबारी और हमला चलता रहा।

नंदकुमार पटेल और बेटे दिनेश की हत्या

हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की मौत हो गई। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत कई लोगों की जान चली गई। झीरम घाटी की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

महेंद्र कर्मा बने नक्सलियों का खास निशाना

महेंद्र कर्मा को नक्सलियों का प्रमुख विरोधी माना जाता था। वह सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल थे। इसी वजह से नक्सलियों ने उन्हें विशेष रूप से निशाना बनाया। हमले के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, नक्सलियों ने काफिले की गाड़ियों को एक-एक करके चेक किया और नेताओं की पहचान की।

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32 लोगों की गई थी जान

25 मई 2013 के इस हमले में कांग्रेस नेताओं और सुरक्षाकर्मियों समेत 32 लोगों की मौत हुई थी। झीरम घाटी हत्याकांड को छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक-नक्सली हमलों में गिना जाता है।

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अब आगे क्या?

NIA कोर्ट द्वारा 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद अब मामले में सजा के ऐलान पर नजर है। वहीं बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट जाने की बात कही है। ऐसे में 13 साल पुराने इस मामले में कानूनी लड़ाई अभी आगे भी जारी रह सकती है। झीरम घाटी केस का फैसला एक बार फिर उस सवाल को सामने ले आया है कि 25 मई 2013 के इस बड़े हमले के पीछे पूरी साजिश क्या थी और इसके सभी जिम्मेदार लोगों तक जांच कितनी पहुंच पाई।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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