Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

सिर्फ 8 रन और... दलीप ट्रॉफी में शतक से चूके वैभव सूर्यवंशी, 92 रन पर हुए आउट, गुस्से में पटका बैट

वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में 92 रन की शानदार पारी खेली। 15 साल की उम्र में उन्होंने सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने का रिकॉर्ड बनाया। शतक से चूकने के बाद वैभव ने गुस्से में बैट पटक दिया। स्टैंड्स में मौजूद आरपी सिंह भी उनका विकेट देखकर हैरान नजर आए। उनकी पारी में आक्रामकता और धैर्य दोनों दिखे।
सिर्फ 8 रन और... दलीप ट्रॉफी में शतक से चूके वैभव सूर्यवंशी, 92 रन पर हुए आउट, गुस्से में पटका बैट
वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में 92 रन की शानदार पारी खेली। 15 साल की उम्र में उन्होंने सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने का रिकॉर्ड बनाया।

दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया। ईस्ट जोन की ओर से पारी की शुरुआत करने उतरे वैभव ने सेंट्रल जोन के खिलाफ 92 रन की शानदार पारी खेली। वह अपने पहले फर्स्ट क्लास शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए। हालांकि, शतक पूरा न कर पाने की निराशा उनके चेहरे पर साफ नजर आई। मैच में आउट होने के बाद उन्होंने गुस्से में अपना बैट पटक दिया।

42 गेंदों में फिफ्टी, बनाया बड़ा रिकॉर्ड

वैभव ने इस मुकाबले में शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने सिर्फ 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। इसके साथ ही वह दलीप ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। 27 मार्च 2011 को जन्मे वैभव ने 15 साल और 157 दिन की उम्र में यह रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने करीब छह दशक पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इससे पहले 1968-69 में सेंट्रल जोन के लक्ष्मण सिंह ने 16 साल और 23 दिन की उम्र में नॉर्थ जोन के खिलाफ 63 रन बनाकर यह रिकॉर्ड बनाया था।

कैच छूटा तो मिला जीवनदान

वैभव की पारी के दौरान उन्हें एक जीवनदान भी मिला। 12 ओवर के बाद वह 28 गेंदों पर 40 रन बना चुके थे। इसी दौरान उनका टॉप एज हवा में गया, लेकिन फील्डर कैच पकड़ नहीं पाया। वैभव को लगा कि उनका कैच हो गया है और वह पवेलियन की ओर चल भी पड़े थे। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि कैच छूट गया है, वह तुरंत वापस क्रीज पर लौट आए। इसके बाद उन्होंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और सिर्फ 42 गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी कर ली।'

X Post

ये भी पढ़ें: US Open के पहले ही दौर में बाहर हुए नोवाक जोकोविच, आंखों में दिखे आंसू, 20 साल बाद ग्रैंड स्लैम में हारे

सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी नहीं, डिफेंस भी दिखाया

वैभव की इस पारी की खास बात सिर्फ उनके चौके-छक्के या तेज बल्लेबाजी नहीं रही। उन्होंने जरूरत पड़ने पर गेंद को सम्मान दिया, डिफेंस किया और स्ट्राइक भी रोटेट की। टी20 क्रिकेट में अपनी तूफानी बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले वैभव इस मुकाबले में रेड-बॉल क्रिकेट की जरूरतों को समझते हुए भी नजर आए। उनकी पारी में आक्रामक शॉट्स के साथ धैर्य और डिफेंस का भी अच्छा संतुलन देखने को मिला।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अब तक ऐसा रहा रिकॉर्ड

वैभव के लिए यह पारी इसलिए भी खास है क्योंकि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका प्रदर्शन अब तक बहुत प्रभावशाली नहीं रहा था। इस मुकाबले से पहले उन्होंने 13 पारियों में 215 रन बनाए थे। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 16.53 का रहा था। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका सबसे बड़ा स्कोर 93 रन है, जो उन्होंने बिहार की ओर से मेघालय के खिलाफ बनाया था। ऐसे में दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में 92 रन की पारी उनके लिए काफी अहम मानी जा रही है।

शतक से 8 रन पहले खत्म हुई पारी

अर्धशतक पूरा करने के बाद वैभव तेजी से शतक की तरफ बढ़ रहे थे। ऐसा लग रहा था कि वह पहली बार फर्स्ट क्लास क्रिकेट में शतक लगाने का सपना पूरा कर लेंगे। लेकिन 92 रन के स्कोर पर उनकी पारी खत्म हो गई। हर्ष दुबे की गेंद पर वैभव ने लेग साइड के ऊपर से बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की। गेंद डीप मिडविकेट की तरफ गई और वहां खड़े फील्डर ने कैच पकड़ लिया। विकेट गिरते ही वैभव की निराशा साफ दिखाई दी और पवेलियन लौटते समय उन्होंने गुस्से में अपना बैट पटक दिया। उनका 92 रन दलीप ट्रॉफी में अब तक का सबसे बड़ा स्कोर बन गया। साथ ही वह अपने फर्स्ट क्लास करियर के सर्वश्रेष्ठ 93 रन के स्कोर से सिर्फ एक रन पीछे रह गए।

ये भी पढ़ें: SBI में ट्रेड फाइनेंस ऑफिसर के 35 पदों पर भर्ती, बिना परीक्षा होगा चयन; 19 सितंबर तक करें आवेदन

स्टैंड्स में बैठे चयनकर्ता भी रह गए हैरान

वैभव के विकेट का असर स्टैंड्स में बैठे चयनकर्ताओं पर भी नजर आया। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज और चयनकर्ता आरपी सिंह मुकाबला देखने पहुंचे थे और वैभव की बल्लेबाजी पर नजर बनाए हुए थे। जैसे ही वैभव 92 रन पर आउट हुए, आरपी सिंह भी उनका विकेट देखकर हैरान नजर आए। उनके अलावा अजय रात्रा और एसएस दास भी मुकाबला देख रहे थे। बीसीसीआई की नई यात्रा नीति के तहत दलीप ट्रॉफी के नॉकआउट मुकाबलों में चयनकर्ताओं की मौजूदगी का प्रावधान किया गया है। ऐसे में वैभव की यह पारी चयनकर्ताओं की नजरों के सामने आई।

सफेद गेंद के बाद अब रेड-बॉल में भी दिखा दम

वैभव सूर्यवंशी की पहचान अब तक मुख्य रूप से सफेद गेंद के क्रिकेट में उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी और कम उम्र में रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी के तौर पर रही है। लेकिन दलीप ट्रॉफी की यह पारी उनके खेल का एक अलग पहलू दिखाती है। सबसे कम उम्र में दलीप ट्रॉफी फिफ्टी का रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ 92 रन की पारी में उन्होंने धैर्य, डिफेंस और स्ट्राइक रोटेशन का भी अच्छा इस्तेमाल किया। शतक भले ही उनसे 8 रन दूर रह गया, लेकिन यह पारी बताती है कि वैभव रेड-बॉल क्रिकेट की चुनौती को भी तेजी से समझ रहे हैं।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...Read More

Latest Posts