Shivani Gupta
20 Jan 2026
भारतीय मूल की विश्वप्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा से औपचारिक रूप से सेवानिवृत्ति ले ली है। उनका रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा। करीब 27 वर्षों तक नासा की सेवा करने वाली सुनीता ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर तीन ऐतिहासिक मिशन पूरे किए और अंतरिक्ष विज्ञान में कई कीर्तिमान स्थापित किए। संयोग से, इन दिनों वह भारत यात्रा पर भी हैं।
सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो राज्य के यूक्लिड शहर में हुआ था। उनके पिता दीपक पांड्या एक जाने-माने न्यूरो वैज्ञानिक थे, जिनका मूल संबंध गुजरात के मेहसाणा से रहा है। वहीं उनकी मां उर्सुलीन बोनी पांड्या स्लोवेनियाई-अमेरिकी मूल की हैं। सुनीता के जीवनसाथी का नाम माइकल जे. विलियम्स है।
सुनीता ने अपने करियर की शुरुआत अमेरिकी नौसेना से की थी। अनुशासन और साहस से भरे इस अनुभव ने उन्हें अंतरिक्ष अभियानों के लिए तैयार किया। वर्ष 1998 में नासा से जुड़ने के बाद उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया और धीरे-धीरे एजेंसी की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हो गईं।
सुनीता विलियम्स ने पहली बार दिसंबर 2006 में स्पेस शटल डिस्कवरी (STS-116) के माध्यम से अंतरिक्ष की यात्रा की। इसके बाद वह STS-117 मिशन के तहत स्पेस शटल अटलांटिस से पृथ्वी पर लौटीं। इस मिशन के दौरान उन्होंने एक्सपीडिशन 14 और 15 में फ्लाइट इंजीनियर की भूमिका निभाई और चार स्पेसवॉक कर नया रिकॉर्ड कायम किया।
वर्ष 2012 में उन्होंने कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से 127 दिनों के लंबे मिशन के लिए उड़ान भरी। वह एक्सपीडिशन 32/33 का हिस्सा रहीं और बाद में एक्सपीडिशन 33 की कमांडर भी बनीं। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन के अहम तकनीकी हिस्सों की मरम्मत के लिए तीन जटिल स्पेसवॉक किए।

अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताए – नासा के इतिहास में दूसरा सर्वोच्च आंकड़ा
अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों में सबसे लंबी एकल उड़ान के मामले में छठा स्थान
कुल 9 स्पेसवॉक, जिनकी अवधि 62 घंटे 6 मिनट रही
किसी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा किया गया अब तक का सबसे लंबा स्पेसवॉक समयविश्व स्तर पर चौथा स्थान
अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली इंसान
नासा के अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ उन्होंने बोइंग स्टारलाइनर और स्पेसएक्स क्रू-9 मिशनों के दौरान 286 दिन अंतरिक्ष में बिताए।
अपने संन्यास की घोषणा पर सुनीता विलियम्स ने कहा,
“जो लोग मुझे जानते हैं, वे समझते हैं कि अंतरिक्ष मेरे लिए सबसे प्रिय स्थान रहा है। तीन बार अंतरिक्ष में उड़ान भरना और एस्ट्रोनॉट ऑफिस की सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा। नासा में बिताए गए 27 वर्ष मेरे लिए अविस्मरणीय हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन ने चंद्रमा और मंगल की भावी यात्राओं की नींव रखी है। मुझे विश्वास है कि हमारा काम आने वाली पीढ़ियों के लिए राह आसान करेगा।”
पिछले वर्ष सुनीता विलियम्स उस समय चर्चा में रहीं, जब वह बोइंग स्टारलाइनर के परीक्षण मिशन के दौरान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर फंस गई थीं। यह मिशन केवल एक सप्ताह के लिए निर्धारित था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण यह नौ महीने से अधिक खिंच गया। आखिरकार वह मार्च में सुरक्षित पृथ्वी पर लौटीं। उनके साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर इससे पहले ही नासा से सेवानिवृत्त हो चुके थे।
मैसाचुसेट्स के नीडहम की रहने वाली सुनीता विलियम्स ने
यूनाइटेड स्टेट्स नेवल अकादमी से भौतिक विज्ञान में स्नातक
फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्राप्त की है
वह अमेरिकी नौसेना की सेवानिवृत्त कप्तान हैं और एक कुशल हेलीकॉप्टर व फिक्स्ड-विंग पायलट भी हैं। उन्होंने 40 से अधिक विमानों में 4,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव हासिल किया है।